द फॉलोअप डेस्क
राजधानी में जी-20 की बैठक होनी है। इसको लेकर रांची को अतिक्रमण मुक्त किया जा रहा है। दीवारों-डिवाइडर व सड़क पर रंग-रोगन का कार्य किया जा रहा है। इस बीच रांची में सड़क के किनारे भीख मांगने वाले, सड़क के फुटपाथ दुकानों में काम करने वाले, कूड़ा-कचरा चुनने वाले बच्चों के बचाव के लिए जिला प्रशासन ने पहल की है। दरअसल मंगलवार को “घुमन्तु बच्चों के बचाव के लिए जागरूकता रथ रवाना किया गया। डीसी राहुल कुमार सिन्हा ने समाहरणालय परिसर से हरी झंडी दिखाकर इसे रवाना किया। डीसी ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि ज्यादा से ज्यादा घुमंतू बच्चे की पहचान कर उनकी समस्या के समाधान के लिए सरकारी पहल से जोड़ें। मौके पर जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्वेता भारती, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी वेद प्रकाश तिवारी व अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। वहीं, घुमन्तू बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ या उनकी समस्या के समाधान के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई, जिला बाल कल्याण समिति से संपर्क किया जा सकता है। इसके लिए दूरभाष संख्या 0651-3505516 जारी किया गया है। इसके अलावा रांची समाहरणालय भवन, ब्लॉक- बी, कमरा संख्या- 111 में जाकर संपर्क किया जा सकता है।

घुमंतु बच्चे कौन हैं?
1. वैसे बच्चे जो भीख मांगते हैं।
2. सड़क किनारे फुटपाथ दुकानों पर काम करते हैं।
3. कूडा-कचरा चुनने वाले बच्चे।
4. आपराधिक कार्यों में मित्र मंडली के प्रभाव में संलिप्त रहने वाले बच्चे।
5. घर से बाहर रहकर मित्र मंडली में नशापान करने वाले बच्चे।
6. सड़क किनारे घुमन्तू स्थिति में पाए जाने वाले बच्चे।
7. अपने परिवार के साथ झुग्गी-झोपड़ी, सड़क किनारे अस्थायी रुप से निवास करने वाले बच्चे।

इन बच्चों को भी माना जाता है घुमंतु
1. वैसे बच्चे जो स्ट्रीट में रहते हैं।
2. जो बच्चे दिनभर स्ट्रीट में घूमते हैं फिर रात में अपने घर आ जाते हैं।
3. वैसे बच्चे जो स्ट्रीट में फुटपाथ पर किसी प्रकार ( जीविका से संबंधित कार्य ) करते हों एवं रात्रि में अपने परिवार के साथ स्ट्रीट ही सोते हों।
4. घुमन्तू प्रकृति के बच्चे जिनका रहने, खाने, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा आदि का कोई स्थायी व्यवस्था न हो।
5. वैसे बच्चे जो घुमन्तू प्रकृति के होते हैं एवं अपने माता-पिता/अभिभावक के अनुमति के बिना कहीं भी चले जाते हैं तथा रात्रि में घर वापस नहीं आते हैं।

इन बच्चों की क्या होती समस्या
1. आवास हेतु स्थायी व्यवस्था नहीं होना।
2. खाने-पीने का स्थायी साधन नहीं होना।
3. शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध नहीं होना।
4. स्वास्थ्य संबंधित उचित देखभाल नहीं होना।
5. शौचालय एवं स्नानागार हेतु उचित व्यवस्था नहीं होना।
6. शिक्षा हेतु समुचित व्यवस्था न हो पाना।
7. बच्चों का अभिभावक द्वारा समुचित देखभाल का अभाव।

सरकार की ओर से चलाई जाती है कई योजनाएं
1. खुला आश्रय गृह।
2. घुमंतू बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करना।
3. बाल कल्याण समिति द्वारा बच्चों का उचित पुनर्वास एवं शिक्षा।
4. प्रयोजन योजना से जुड़ाव के माध्यम से प्रति माह 2000 रुपये की आर्थिक सहायता।
5. फॉस्टर केयर योजना से जोड़कर प्रतिमाह 2000 हजार रुपये की आर्थिक सहायता।
6. अन्य सरकारी योजनाओं से बच्चों का जुड़ाव।
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