द फॉलोअप डेस्क/रांची
आजसू पार्टी प्रमुख एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो ने झारखंड में नगर निकाय चुनाव न कराने पर झारखंड हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी को लेकर हेमंत सरकार पर निशाना साधा है। महतो ने कहा कि झामुमो–कांग्रेस की सरकार पिछड़ों को आरक्षण नहीं देना चाहती। साथ ही स्थानीय निकायों को अफसरों के भरोसे चलाना चाहती है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट की टिप्पणी से स्पष्ट हो गया कि झामुमो और कांग्रेस को लोकतांत्रिक मूल्यों में भरोसा नहीं।
महतो ने आगे कहा कि झामुमो–कांग्रेस नगर निकाय में ओबीसी को आरक्षण नहीं देना चाहते और इसे टालने का बहाना ढूंढते रहते हैं। राज्य सरकार गंभीर रहती तो काफी पहले ट्रिपल टेस्ट करवा कर नगर निकाय चुनाव करवा सकती थी। जब आजसू पार्टी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तब सरकार OBC आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट करवाने पर मजबूर हुई। हाई कोर्ट ने 4 जनवरी 2024 को ही आदेश दिया था कि तीन सप्ताह में नगर निकाय चुनाव करवाया जाए, लेकिन राज्य सरकार ने जानबूझकर ट्रिपल टेस्ट अभी तक पूरा नहीं किया और विगत एक वर्ष से ओबीसी आयोग के अध्यक्ष का पद खाली रखकर ट्रिपल टेस्ट में देरी की साजिश की गई। विगत 4 माह से मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद भी नहीं भरा जा रहा है। इससे साबित हो जाता है कि झामुमो–कांग्रेस लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने में जुट हैं।
उन्होंने आगे कहा कि नगर निकायों में जनप्रतिनिधि नहीं होने के कारण स्वच्छता, बुनियादी ढांचा और शहरी विकास जैसे मुद्दों पर जनता की उपेक्षा की जा रही है। राज्य में कानून का शासन चले, राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिएl सरकार संविधान और लोकतंत्र का गला नहीं घोट सकती। नगर निकाय चुनाव टालकर जनता को उनके हक से वंचित करने का अधिकार सरकार को नहीं है l अदालत की टिप्पणी राज्य सरकार के निकम्मेपन को दर्शाती है।