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हिमंता बिस्वा सरमा का बड़ा बयान : प बंगाल के बाद अब झारखंड भाजपा का अगला लक्ष्य

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द फॉलोअप डेस्क 

एक हालिया साक्षात्कार में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि पर बंगाल के बाद झारखंड अब भाजपा का अगला लक्ष्य होगा। दरअसल सरमा उस सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें पूछा गया था कि झारखंड में भाजपा पिछले विधानसभा चुनाव में क्यो असल रही, जबकि इस चुनाव में सरमा की सक्रिय भागी रही। इसके जवाब में सरमा ने कहा, “झारखंड हमारे एजेंडा में है। यहां की डेमोग्राफी बदल गयी है। यहां मुर्शिदाबाद के रास्ते घुसपैंठ हुई है। झारखंड को भाजपा की जरूरत है। झारखंड हमारा अनफिनिश्ड एजेंडा है। प बंगाल के बाद हम यहां सरकार बनाने की कोशिश करेंगे।“ उन्होंने आगे कहा कि असफलता, दरअसल सफलता का पहला पड़ाव होता है।  


कांग्रेस के बारे में ये कहा 
इस मौके पर सरमा ने मणिपुर में चल रहे संघर्ष के बारे में भी बात की और कहा कि इसे सिर्फ़ इसमें शामिल समुदाय ही सुलझा सकते हैं। कांग्रेस के बारे में बात करते हुए, उन्होंने राहुल गांधी पर मुख्य विपक्षी पार्टी को उसकी पारंपरिक "मध्यमार्गी" राजनीति से हटाकर JNU से "उधार ली गई" वामपंथी विचारधारा और जाति-केंद्रित राजनीति की ओर ले जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "मैं 22 साल तक कांग्रेस में रहा। वहां कभी 'डफली-वाला' यानी, सड़क पर विरोध प्रदर्शनों में इस्तेमाल होने वाला हाथ का ड्रम कल्चर नहीं था। जातिवाद के बारे में कभी बात नहीं हुई। कांग्रेस हमेशा मध्यमार्गी रही। विचारधारा में कभी ऐसा बदलाव नहीं आया। उन्होंने अब अपनी मध्यमार्गी स्थिति खो दी है। इसीलिए नेहरू, गांधी और सरदार पटेल को मानने वाले लोग मौजूदा कांग्रेस से खुद को जुड़ा हुआ महसूस नहीं करते।"

असम की समस्या पर काबू पा लेने की बात कही  
जब उनसे पूछा गया कि क्या मई में दोबारा चुने जाने के बाद अगले पांच सालों में सरमा का कोई नरम चेहरा देखने को मिलेगा, तो उन्होंने कहा: "मुझे नहीं लगता कि असम में ध्रुवीकरण की ज़रूरत है। मैंने उस समस्या को काबू में कर लिया है। अब कोई भी असमिया लोगों पर उंगली नहीं उठा सकता। किसी में मंदिरों की ज़मीन पर कब्ज़ा करने की हिम्मत नहीं है, किसी में बिना मर्ज़ी के किसी लड़की को उठाने की हिम्मत नहीं है। अब लोग सही रास्ते पर आ गए हैं, लोग कानून मानने लगे हैं। जब सब कानून का पालन करते हैं, तो मुझे हर दिन बोलने की ज़रूरत नहीं है। मुझे तभी बोलना पड़ता है जब ज़रूरत हो।"

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