जामताड़ा:
जामताड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों में चरमराई बिजली व्यवस्था के खिलाफ उपभोक्ताओं का आक्रोश अब आंदोलन में बदल चुका है। जामताड़ा प्रखंड की पंजनिया और मेंझीया पंचायत के ग्रामीणों ने वीरग्राम मोड़ पर एक संयुक्त बैठक कर बिजली विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि विद्युत आपूर्ति में तुरंत सुधार नहीं हुआ, तो एक बड़ा जनांदोलन शुरू किया जाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष मिर्धा ने बताया कि 6 महीने पहले ग्रामीणों की सहमति के बिना इलाके को बुधुडीह फीटर से हटाकर हीरापुर फीडर से जोड़ दिया गया। तभी से स्थिति बद से बदतर हो गई है। उमस भरी गर्मी में भी ग्रामीणों को 24 घंटे में महज 1-2 घंटे ही बिजली मिल पाती है। कई बार लगातार 3 या 4 दिनों तक बिजली की आपूर्ति नहीं की जाती।

बिजली संकट से जूझ रहा गांव का प्रत्येक वर्ग
बिजली संकट के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई, खेती-किसानी, पेयजल आपूर्ति और छोटे व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गए हैं। ग्रामीणों ने याद दिलाया कि वर्षों पहले ग्रामीणों ने स्वयं आर्थिक सहयोग देकर इस बिजली लाइन को अपने गांवों तक पहुंचाया था, लेकिन आज विभाग की लापरवाही के कारण वही लोग अंधकार में रहने को विवश हैं।

विभाग की बेरुखी से परेशान हैं सारे ग्रामीण
प्रशासन और विभाग की बेरुखी को देखते हुए ग्रामीणों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ग्रामाणों ने तय किया है कि 4 जुलाई को पंजनिया फुटबॉल मैदान में हजारों उपभोक्ताओं की एक महापंचायत बुलाई गई है, जिसमें आंदोलन की अंतिम रूपरेखा तैयार होगी। महापंचायत में यह भी तय किया जाएगा कि 5 जुलाई को बिजली विभाग के कार्यालय का घेराव किया जाए या सीधे संबंधित मंत्री के आवास के समक्ष प्रदर्शन किया जाए।

बैठक में सभी वर्गों के लोगों ने लिया हिस्सा
बैठक में काजल मंडल, खोखन दत्ता, मोहम्मद गुलजार अंसारी, फुरकान अंसारी समेत भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। सभी ने एकजुट होकर बिजली व्यवस्था सुधरने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही नियमित बिजली बहाल नहीं हुई, तो उग्र आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन की होगी।