पाकुड़:
पाकुड़ में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम के न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हत्यारोपी सोबेन मरांडी को उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, एडीजे-1 कुमार क्रांति प्रसाद की कोर्ट ने इस केस में जांच अधिकारी की लापरवाही पर नाराजगी जाहिर करते हुए निर्णय की कॉपी DGP को भेजने का आदेश दिया है। मामला महेशपुर थाना कांड संख्या 169/2023 का है, जिसमें अभियुक्त सोबेन मरांडी ने अपनी कथित प्रेमिका सूचिका टुडू के पिता मदन टुडू की धारदार हथियार से हत्या कर दी थी और मां रोशो मुर्मू को मारकर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया।
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की है कि पुलिस हत्यारोपी को कड़ी सजा दिलाने के लिए जरूरी सबूत जुटाने में नाकाम रही। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने इस केस में घोर लापरवाही बरती है। आखिरकार, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की दलीलों और अदालत द्वारा पीड़िता से किए गए सवालों के आधार पर हत्यारोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

रिश्ते से मना करने पर पिता की हत्या की थी
गौरतलब है कि आजीवन कारावास की सजा पाने वाले सोबेन मरांडी की मुलाकात सूचिका टुडू नाम की युवती से एक आदिवासी मेले में कार्यक्रम प्रस्तुत करने के दौरान हुआ था। मुलाकात के बाद दोनों के बीच फोन कॉल पर बातचीत होने लगी थी। सोबेन शादी करना चाहता था, लेकिन सूचिका के माता-पिता इस रिश्ते का विरोध करते थे। इस बात से नाराज सोबेन मरांडी ने वारदात वाले दिन आधी रात को घातक हथियार के साथ सूचिका के घर में घुसपैठ की और सूचिका के पिता मदन टुडू की धारदार हथियार (तलवार/गुप्ती) से नृशंस हत्या कर दी और उनकी पत्नी रोशो मुर्मू पर जानलेवा हमला कर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया था। हमले में रोशो मुर्मू के चेहरे और सिर पर गंभीर चोट पहुंची।

जांच अधिकारी ने केस में लापरवाही बरती
अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में कुल 5 गवाह (PW-1 से PW-5) पेश किए गए। सुनवाई के दौरान सामने आया कि आईओ कैला उरांव ने जब्ती सूची में दर्ज हथियार (तलवार/गुप्ती) और खून से सने कपड़े न तो न्यायालय में पेश किए और न ही उनकी फॉरेंसिक जांच कराई। इसके अलावा घायल पीड़िता की इंजरी रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर पेश नहीं की गई और कुछ गवाह भी मुकर गए।
पीपी की दलीलें और न्यायालय का सक्रिय हस्तक्षेप
मामले के कमजोर पड़ने की स्थिति में लोक अभियोजक (PP) लुकास कुमार हेमरम ने अभियोजन का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने तर्क दिया कि आईओ की चूक के कारण न्याय प्रभावित नहीं होना चाहिए और चश्मदीद का बयान सजा के लिए पर्याप्त है।
इसके साथ ही अदालत ने सच्चाई तक पहुंचने के लिए स्वतः संज्ञान लेते हुए एकमात्र चश्मदीद घायल गवाह रोशो मुर्मू (मृतक की पत्नी) से सीधे प्रश्न पूछे। पीड़िता ने अदालत के समक्ष घटना और सिर पर आई चोटों का विवरण स्पष्ट रूप से दिया। न्यायालय ने पीड़िता के मौखिक साक्ष्य (Oral Evidence) को पूर्णतः विश्वसनीय मानते हुए दोषी को सजा सुनाई।

कोर्ट ने इन धाराओं में दोषी सोबेन को सुनाई सजा
गौरतलब है कि हत्या के आरोप में दोषी करार दिए गए सोबेन मरांडी को कोर्ट ने धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 1 लाख रुपये का जुर्माना (जुर्माना नहीं देने पर 1 वर्ष अतिरिक्त कारावास), धारा 307 के तहत आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये का जुर्माना (जुर्माना नहीं देने पर 1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास), धारा 326 के तहत 7 वर्ष का सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये का जुर्माना (जुर्माना नहीं देने पर 1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास), धारा 452 के तहत 5 साल की जेल और 25 हजार रुपये का जुर्माना देने की सजा सुनाई है। सभी सजा साथ-साथ चलेगी।
अदालत ने दोषी पर लगाए गए कुल 2 लाख रुपये की जुर्माना राशि को पूरा पीड़िता रोशो मुर्मू को देने का आदेश दिया है। इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), पाकुड़ को 'विक्टिम कंपनसेशन स्कीम' के तहत पीड़िता को समुचित अतिरिक्त मुआवजा प्रदान करने का निर्देश दिया गया है।