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जमशेदपुर : 4 माह में 8 गर्भवती की मौत, DC ने कहा - सभी MOIC जिम्मेदारी लें और अपनी कमियों को करें दुरूस्त

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द फॉलोअप डेस्क
,पूर्वी सिंहभूम जिले में 2025-26 में, यानी अप्रैल से अबतक 8 गर्भवती महिलाओं की मौत स्वास्थ्य कारणों से हुई है। इसपर जिले के डीसी कर्ण सत्यार्थी ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि एक भी गर्भवती की मृत्यु होना प्रशासन की नाकामी है इसकी सभी एमओआईसी जिम्मेदारी लें और कमियों को दुरूस्त करें। एमओआईसी नियमित फील्ड विजिट करें और ग्रामीणों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखें। साथ ही, सुदूर-दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सुलभता से उपलब्ध हो, इस दिशा में भी समेकित प्रयास करें। उन्होंने निर्देश दिया कि शत-प्रतिशत गर्भवती माताओं का सुरक्षित एवं संस्थागत प्रसव कराया जाये, ताकि मातृ-शिशु मृत्यु दर को शून्य किया जा सके।

दरअसल, जमशेदपुर के समाहरणालय स्थित सभागार में डीसी कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षात्मक बैठक हुई। इस बैठक में संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, कुपोषण, परिवार नियोजन, ममता वाहन की उपलब्धता समेत गैर-संचारी रोगों की रोकथाम सहित अन्य स्वास्थ्य सेवाओं में प्रगति व गुणवत्ता की समीक्षा हुई। बैठक में पूर्ण टीकाकरण में शहरी क्षेत्र को छोड़कर अन्य सभी प्रखंडों में लक्ष्य के अनुरूप उपलब्धि नहीं पाई गयी। डीसी ने सख्त निर्देश दिया कि सभी एमओआईसी प्रत्येक नवजात को टीका लगाना सुनिशश्चित करें। कुपोषण उपचार केंद्रों की बेड ऑक्यूपेंसी शत-प्रतिशत रखे जाने के साथ-साथ कुपोषण ग्रस्त बच्चो को लगातार चिन्हित करते हुए उपचारित करने का निर्देश दिया। परिवार नियोजन कार्यक्रम को गति देने, गैर-संचारी रोगों (NCDs) की नियमित स्क्रीनिंग गतिविधियों को और व्यापक बनाने, तथा ममता वाहनों की उपलब्धता सभी प्रखंडों में सुनिश्चित करने पर जोर दिया। 
इस दौरान डेंगू, मलेरिया एवं अन्य मौसमी संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उपचार पर भी विशेष चर्चा हुई। उपायुक्त ने प्रभावित क्षेत्रों में नियमित सर्वेक्षण व त्वरित चिकित्सीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। इसके साथ ही, नेशनल वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम, राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम, टीबी उन्मूलन अभियान और एनीमिया मुक्त भारत अभियान की प्रगति रिपोर्ट पर विस्तृत समीक्षा की गई। उपायुक्त ने कहा कि इन सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को प्राथमिकता के साथ क्रियान्वित किया जाए तथा जमीनी स्तर पर उनके लाभार्थियों तक समय पर सेवाएं पहुँचें, इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग और अंतर-विभागीय समन्वय बनाकर कार्य करें।

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