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गढ़वा में 100 करोड़ की डंपिंग यार्ड योजना होगी शुरू, सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद DC ने दानरो नदी में कचरा डंपिंग पर लगाई रोक

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गढ़वा 
गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र में पिछले 7 सालों से अधूरी पड़ी 100 करोड़ की कचरा डंपिंग यार्ड योजना अब एक बार फिर सुर्खियों में है। फॉरेस्ट क्लीयरेंस न मिलने और सुखबाना गांव के ग्रामीणों के उग्र विरोध के कारण यह महत्वाकांक्षी योजना अधर में लटकी हुई है। नतीजा यह है कि शहर का सारा कचरा दानरो नदी में फेंका जा रहा है, जिससे नदी का अस्तित्व खतरे में है। इस गंभीर स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद, गढ़वा उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने दानरो नदी का औचक निरीक्षण किया और अधिकारियों को नदी में कचरा फेंकने पर पूरी तरह रोक लगाने व सुखबाना में वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण शुरू करने का सख्त निर्देश दिया है। दानरो नदी का दम घोंट रहा कचरा
शहरी क्षेत्र का पूरा कचरा बिना किसी वैज्ञानिक सोच के सीधे दानरो नदी में डंप किया जा रहा है। इसके कारण नदी का पानी पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है और चारों तरफ कचरे का भयानक अंबार लगा हुआ है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि अब इस जीवनदायिनी नदी के अस्तित्व पर ही सवालिया निशान खड़ा हो गया है। नदी से सटे इलाकों में एक घनी आबादी बसती है, जो इस गंदगी से फैलने वाली बीमारियों और दुर्गंध के साए में जीने को मजबूर है। स्थानीय लोग इस प्रदूषण के कारण हर दिन नरकीय जीवन जी रहे हैं। 2019 की ₹100 करोड़ की योजना
इस गंभीर समस्या से परमानेंट निजात दिलाने के लिए साल 2019 में तत्कालीन रघुवर सरकार के कार्यकाल में 100 करोड़ रुपये की 'कचरा निस्तारीकरण सह डंपिंग यार्ड' योजना को मंजूरी दी गई थी। लेकिन शुरुआत से ही यह योजना विवादों में रही। जमीन तलाशने के दौरान पहले दो अलग-अलग गांवों को चुना गया, लेकिन वहां भारी विरोध हुआ। इसके बाद प्रशासन ने इसे तीसरी जगह, शहर से बिल्कुल सटे ग्रामीण इलाके सुखबाना गांव में शिफ्ट किया। सुखबाना में ग्रामीणों का अतिक्रमण और उग्र विरोध
सुखबाना गांव में प्रशासन ने जमीन चिन्हित कर घेराबंदी का काम तो पूरा कर लिया, लेकिन इसके बावजूद विवाद शांत नहीं हुआ। स्थानीय ग्रामीणों ने बाउंड्री के अंदर की जमीन को अपनी मिल्कियत बताते हुए वहां अतिक्रमण कर लिया और अपनी झोपड़ियां खड़ी कर दीं। ग्रामीणों का विरोध इस कदर बढ़ चुका है कि उनका साफ कहना है कि हम अपनी जान दे देंगे, लेकिन यहां किसी भी कीमत पर डंपिंग यार्ड नहीं बनने देंगे।" इसके अलावा, फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन विभाग की अनुमति) न मिलना भी इस योजना के अधर में लटके रहने की एक बड़ी वजह है।सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक्शन में जिला प्रशासन
कचरा प्रबंधन की इस बदहाली को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है और जिला प्रशासन को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट का डंडा चलते ही गढ़वा के उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा खुद एक्शन मोड में आ गए हैं। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दानरो नदी का औचक निरीक्षण किया।ग्राउंड जीरो पर भड़के उपायुक्त, लापरवाही पर जताई कड़ी चिंता
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने देखा कि नदी के अलग-अलग हिस्सों में बेहद लापरवाही और अवैज्ञानिक तरीके से कचरा फेंका गया है। इतना ही नहीं, कई जगहों पर कचरे के ढेरों में आग लगी हुई थी, जिससे जहरीला धुआं निकल रहा था और पूरे इलाके का पर्यावरण प्रदूषित हो रहा था। इस बदहाली को देखकर उपायुक्त ने गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ऑन-द-स्पॉट सख्त हिदायत दी कि किसी भी परिस्थिति में दानरो नदी या उसके आसपास कचरा नहीं फेंका जाना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि पर्यावरण संरक्षण में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 
सुखबाना में ही होगा वैज्ञानिक निस्तारण
दानरो नदी का मुआयना करने के बाद उपायुक्त सीधे सुखबाना स्थित कचरा प्रबंधन के लिए चिन्हित स्थल पर पहुंचे और वहां का जायजा लिया। स्थल निरीक्षण के बाद उन्होंने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार को कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि नगर क्षेत्र से निकलने वाले शत-प्रतिशत कचरे को अब दानरो नदी के बजाय इसी निर्धारित सुखबाना स्थल पर डंप किया जाए और बिना किसी देरी के वहां कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था जल्द से जल्द बहाल की जाए।

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