द फॉलोअप डेस्क
झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) नियमावली के प्रारूप में शामिल जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर जिलेवार सुझाव शिक्षा विभाग को मिल चुके हैं। पलामू और गढ़वा से भोजपुरी-मगही को क्षेत्रीय भाषा में शामिल करने की मांग की गई है, वहीं खूंटी जिले से मुंडारी को जनजातीय भाषा सूची में जोड़ने की सिफारिश आई है।
जेटेट नियमावली का प्रारूप जारी होते ही इन जिलों में भाषाओं को लेकर विवाद शुरू हो गया था। कई जिलों में स्थानीय संगठनों और राजनीतिक दलों ने इसका विरोध भी किया था। इसको लेकर शिक्षा विभाग ने सभी जिलों से रिपोर्ट और सुझाव मांगे थे, जो अब प्राप्त हो चुके हैं। पलामू और गढ़वा जिलों से भेजे गए सुझाव में कहा गया है कि यहां हिंदी के बाद सबसे अधिक भोजपुरी और मगही बोली जाती है। ऐसे में इन्हें क्षेत्रीय भाषा के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए।
भाजपा, जदयू और कई सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे पर राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की थी। इनका आरोप था कि राज्य सरकार राजनीतिक कारणों से भोजपुरी और मगही की अनदेखी कर रही है। इस पर राजभवन ने भी शिक्षा विभाग से रिपोर्ट तलब की थी। शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह ने कहा कि विभाग को सभी जिलों से रिपोर्ट मिल चुकी है। अब इस पर अंतिम फैसला सरकार स्तर पर लिया जाएगा। उच्चस्तरीय बैठक में यह विषय रखा जाएगा और निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सरकार के फैसले का इंतजार है।
