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SLBC : एक साल में CD रेशियो में 3.65 की वृद्धि लेकिन कृषि ऋण पर आरबीआई ने जतायी चिंता

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द फॉलोअप, रांची
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने शुक्रवार को सदन में एसएलबीसी की रिपोर्ट पेश की। इसमें सीडी रेशियों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। झारखंड में बैंकिंग क्षेत्र की कर्ज देने की क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2025 से 30 जून 2026 के बीच राज्य का क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो 51.32 प्रतिशत से बढ़कर 54.97 प्रतिशत हो गया। यानी एक वर्ष में 3.65 प्रतिशत अंक (करीब 7.10 प्रतिशत) की वृद्धि दर्ज की गई। आरबीआई के मुताबिक, 30 जून 2026 तक राज्य में बैंकों की कुल जमा राशि 4,04,979 करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि कोर क्रेडिट 1,82,282 करोड़ रुपये रहा। वहीं, उपलब्ध संसाधनों के आधार पर कुल ऋण वितरण 31,446 करोड़ रुपये और ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (RIDF) के तहत 8,886 करोड़ रुपये रहा। इन दोनों को मिलाकर राज्य का कुल ऋण 2,22,613 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। लेकिन आरबीआई ने तय लक्ष्य से काफी कम कृषि ऋण दिए जाने पर चिंता जतायी है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 में राज्य का CD रेशियो 45.08 प्रतिशत था, जो 2024 में बढ़कर 49.57 प्रतिशत, 2025 में 51.32 प्रतिशत और अब 30 जून 2026 तक 54.97 प्रतिशत हो गया है। इससे स्पष्ट है कि पिछले तीन वर्षों में झारखंड में बैंक जमा के मुकाबले ऋण वितरण की रफ्तार लगातार बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि CD रेशियो में वृद्धि राज्य में निवेश, उद्योग, व्यापार, कृषि और सेवा क्षेत्र में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों का संकेत है। अधिक CD रेशियो का अर्थ है कि बैंक जमा की तुलना में अधिक राशि ऋण के रूप में उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलने की संभावना बढ़ती है। आरबीआई के मास्टर सर्कुलर के अनुसार, CD रेशियो की गणना में उपलब्ध संसाधनों और ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (RIDF) के तहत दिए गए ऋण को भी शामिल किया जाता है। इसी आधार पर झारखंड का CD रेशियो वर्ष 2026 में लगभग 55 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है, जो राज्य के बैंकिंग क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

झारखंड में कृषि ऋण का हिस्सा आरबीआई के लक्ष्य से काफी कम, एसएलबीसी ने जताई चिंता

झारखंड में कृषि क्षेत्र को मिलने वाले बैंक ऋण में बढ़ोतरी होने के बावजूद इसकी हिस्सेदारी अब भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2026 तक कृषि ऋण में 2,244 करोड़ रुपये (9.65 प्रतिशत) की वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद राज्य के कुल ऋण में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी केवल 13.99 प्रतिशत रही।

आरबीआई ने बैंकों के लिए कृषि क्षेत्र को कुल ऋण का 18 प्रतिशत उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ऐसे में झारखंड अभी भी इस लक्ष्य से काफी पीछे है, जो चिंता का विषय माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कृषि क्षेत्र को अधिक ऋण उपलब्ध कराने के लिए बैंकों को प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending-PSL) के निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रयास तेज करने की आवश्यकता है। कृषि क्षेत्र में ऋण की कम हिस्सेदारी को राज्य की आर्थिक प्रगति के लिए एक बड़ी चुनौती बताया गया है।

इसी मुद्दे को देखते हुए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की बैठकों में कृषि ऋण की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। समिति ने बैंकों से कृषि क्षेत्र में ऋण वितरण बढ़ाने और आरबीआई के लक्ष्य के अनुरूप प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया है। एसएलबीसी ने सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) और जिला अग्रणी बैंक प्रबंधकों (LDMs) को निर्देश दिया है कि वे अपनी ऋण वितरण रणनीति की समीक्षा करें। साथ ही, प्राथमिकता क्षेत्र के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए विशेष अभियान चलाकर कृषि क्षेत्र में ऋण प्रवाह बढ़ाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई करें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कृषि क्षेत्र को पर्याप्त बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है, तो इससे किसानों की आय बढ़ाने, कृषि निवेश को प्रोत्साहन देने और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने में मदद मिलेगी।

जून तिमाही तक 8,739 छात्रों को मिला 194 करोड़ रुपये का लोन

 झारखंड में उच्च शिक्षा के लिए बैंक शिक्षा ऋण (Education Loan) देने में तेजी आई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की जून 2026 तिमाही तक राज्य के विभिन्न बैंकों ने 8,739 छात्रों को 193.63 करोड़ रुपये का शिक्षा ऋण स्वीकृत और वितरित किया है। यह जानकारी बैंकों की तिमाही रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक शिक्षा ऋण के तहत 49,650 खाते संचालित हैं, जिनमें कुल 2,78,281.45 लाख रुपये (करीब 2,782.81 करोड़ रुपये) का बकाया ऋण है। वहीं, राज्य में शिक्षा ऋण से जुड़े कुल खातों की संख्या 29,567 है, जिनमें कुल 89,998.09 लाख रुपये के नए ऋण स्वीकृत किए गए।

इन बैंकों ने सबसे अधिक शिक्षा ऋण दिया

वित्तीय वर्ष 2026-27 की जून तिमाही तक शिक्षा ऋण वितरण में प्रमुख बैंक रहे—

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) – 24.10 करोड़ रुपये
बैंक ऑफ इंडिया – 15.69 करोड़ रुपये
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) – 86.68 करोड़ रुपये
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया – 63.04 करोड़ रुपये
यूको बैंक – 58.89 करोड़ रुपये
बैंक ऑफ बड़ौदा – 12.84 करोड़ रुपये
छात्राओं को भी मिला लाभ

रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 की जून तिमाही तक 21,111 छात्राओं को 1,225 करोड़ रुपये का शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया गया है। इससे उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओं को आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता और मजबूत हुआ है।

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) का मानना है कि शिक्षा ऋण योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। बैंकों से अपेक्षा की गई है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें ताकि जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को समय पर शिक्षा ऋण का लाभ मिल सके।


 

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