द फॉलोअप डेस्क
झारखंड सरकार को जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक 16,408.78 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। वाणिज्य कर विभाग की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य को यह घाटा 2017-18 से लेकर 2024-25 तक हुआ है। वहीं अगर यही रुझान जारी रहा तो आने वाले 5 सालों में यानी 230 तक यह घाटा करीब 61,677 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 में राजस्व नुकसान 8136.05 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह घाटा हर साल बढ़ते हुए 2029-30 में 17,257.60 करोड़ तक पहुंच सकता है। हालांकि, जीएसटी लागू होने के शुरुआती साल यानी 2017-18 में झारखंड के रासस्व में 297.16 करोड़ रुपये की थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गयी थी, लेकिन उसके बाद से लगातार नुकसान ही हो रहा है।
पहले झारखंड से बाहर भेजे जाने वाले माल पर सेंट्रल सेल्स टैक्स (CST) लगता था, जो राज्य के खाते में जाता था। लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद इस टैक्स की वसूली बंद हो गई। अब किसी भी उत्पाद पर टैक्स तभी मिलता है, जब उसकी खपत झारखंड के भीतर हो। इस वजह से राज्य के खजाने को बड़ा झटका लगा है। झारखंड की प्रति व्यक्ति आय देश में 26वें स्थान पर है। इसका सीधा असर उपभोग क्षमता पर पड़ता है। जितनी ज्यादा खपत, उतना ज्यादा जीएसटी संग्रह। लेकिन झारखंड में कम खपत के कारण जीएसटी से होने वाली आमदनी सीमित ही रहती है।
दिलचस्प बात यह है कि बिहार की प्रति व्यक्ति आय झारखंड से भी कम है, फिर भी बिहार को जीएसटी में उतना नुकसान नहीं हुआ। इसका कारण है—बिहार में बड़ी औद्योगिक इकाइयों की कमी। झारखंड में कंपनियां जरूर हैं, लेकिन उत्पादन के बाद माल बाहर भेजने से टैक्स झारखंड को नहीं मिल पाता। झारखंड में जीएसटी लागू होने के बाद से लगातार राजस्व नुकसान का यह सिलसिला राज्य सरकार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। वाणिज्य कर विभाग ने इस रिपोर्ट के आधार पर आगामी वित्तीय प्रबंधन की रूपरेखा तय करने की तैयारी शुरू कर दी है।
