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इरफान अंसारी का बड़ा बयान : लोकतंत्र पर हमला है मोदी सरकार का नया बिल, विधायिका को कमजोर करने की साजिश

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रांची/नई दिल्ली
केंद्र सरकार द्वारा संसद में लाए गए तीन नए संविधान संशोधन विधेयकों को लेकर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इन विधेयकों के ज़रिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों को उनके पदों से हटाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रावधान किया गया है। डॉ. अंसारी ने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताते हुए मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की है।
डॉ. अंसारी ने कहा, "अंधेर नगरी चौपट राजा... यही हालात पैदा कर रही है केंद्र की मोदी सरकार। प्रधानमंत्री, मंत्री, सांसद और विधायक — यही लोकतंत्र की खूबसूरती हैं। इन्हें कमजोर करना लोकतंत्र की आत्मा पर चोट है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार जनता के बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बिल ला रही है, जिससे चुने हुए प्रतिनिधियों का मनोबल टूटे और विधायिका की गरिमा को ठेस पहुंचे।


डॉ. अंसारी ने प्रधानमंत्री से सीधा सवाल पूछा: "क्या कोई आपको गिरफ्तार कर सकता है? अगर नहीं, तो फिर सांसदों और विधायकों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? यह न सिर्फ जनप्रतिनिधियों का अपमान है, बल्कि लोकतंत्र की नींव को हिलाने की कोशिश है।"
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि यदि मोदी सरकार में हिम्मत है, तो वह न्यायपालिका और कार्यपालिका की शक्तियों पर भी बिल लाकर दिखाए — लेकिन ऐसा नहीं किया जाएगा क्योंकि वहां "एकता और अखंडता" है। उनका आरोप था कि सिर्फ विधायिका को निशाना बनाकर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है।


डॉ. अंसारी ने केंद्र सरकार से अपील की: "मोदी जी, विधायिका को बचाइए, लोकतंत्र को बचाइए। विधायिका को मजबूत कीजिए, ताकि जनता का विश्वास इस पर और गहरा हो। यही लोकतंत्र की असली ताकत है।"
विपक्ष में बढ़ रही बेचैनी
डॉ. अंसारी के इस बयान को विपक्ष के उस बढ़ते असंतोष का हिस्सा माना जा रहा है, जो केंद्र सरकार के इन नए विधेयकों को लेकर उभर रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर संसद से सड़क तक विरोध तेज कर सकते हैं।

बता दें कि केंद्र सरकार ने आज ही तीन ऐसे विधेयक पेश किए हैं, जिनमें जनप्रतिनिधियों — जैसे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और विधायकों को पद से हटाने की प्रक्रिया में संशोधन का प्रस्ताव है। सरकार का तर्क है कि इससे "जवाबदेही" सुनिश्चित होगी, जबकि विपक्ष इसे "लोकतंत्र की हत्या" करार दे रहा है।


 

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