द फॉलोअप डेस्क
गुमला सदर अस्पताल में मंगलवार को एक दिल को झकझोर देने वाली घटना घटी। इलाज के लिए अपनी डेढ़ साल की बीमार बेटी को लेकर आए एक पिता को अस्पताल की लंबी लाइन में पर्ची कटाने के लिए डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इस बीच बच्ची की हालत बिगड़ती रही और बिना इलाज के ही उसने दम तोड़ दिया।
घटना गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड के बाम्दा कोरकोटोली गांव की है। यहां के रहने वाले कमलेश उरांव अपनी बेटी खुशी को लेकर सुबह करीब 10:30 बजे गुमला सदर अस्पताल पहुंचे थे। बच्ची को 3 दिन से तेज बुखार था और हालत गंभीर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने पर गार्ड ने कमलेश को पहले पर्ची कटवाने के लिए कहा। वे ओपीडी के बाहर लगी लंबी कतार में लग गए। करीब 12:04 बजे पर्ची मिली, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बच्ची की मौत हो चुकी थी।
कमलेश ने बताया कि बेटी की तबीयत खराब होने पर उन्होंने घाघरा के दरदाग गांव में रहने वाले अपने जीजा से 13 हजार रुपये उधार लिए थे ताकि इलाज करवा सकें। पहले उन्होंने चैनपुर में इलाज करवाया लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ, इसीलिए बच्ची को सदर अस्पताल लाया गया। अस्पताल की लापरवाही की पोल तब खुली जब बच्ची की हालत बिगड़ते देख एक सहिया ने डॉक्टर को बुलाया, लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुकी थी। हालांकि, अस्पताल के डॉक्टर रुद्र कश्यप ने दावा किया कि बच्ची की मौत अस्पताल लाने से पहले ही हो चुकी थी। लेकिन सवाल यह है कि अगर अस्पताल में आपातकालीन इलाज की व्यवस्था होती, तो शायद कमलेश की बेटी की जान बचाई जा सकती थी। यह घटना एक बार फिर अस्पताल की लचर व्यवस्था और सिस्टम की बेरुखी को उजागर करती है।
