जेब अख्तर
झारखंड के पुरोधा, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक, दिशोम गुरु, अलग झारखंड राज्य के संघर्ष के सेनानी, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और अपनी पीढ़ी के अंतिम वरिष्ठ आदिवासी नेता शिबू सोरेन अब इस दुनिया में नहीं रहे। वे अपनी अंतिम यात्रा पर निकल चुके हैं, जनता को अंतिम जोहार कह गए, और पंचतत्व में विलीन हो गए।
उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव नेमरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ संपन्न हुआ। शोकाकुल वातावरण में उनके पुत्रों—हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस भावुक क्षण के साक्षी न केवल उनके समर्थक बने, बल्कि राजनीतिक दलों के विपक्षी नेता भी नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।
अंतिम संस्कार से पहले परंपरागत आदिवासी संस्कारों का पूर्णतः पालन किया गया। नेमरा गांव के लोग पूरी आस्था और भावनाओं के साथ इसमें सम्मिलित हुए। गांव की गलियों में पसरा सन्नाटा, हर आंख में बहते आंसू—ये सब एक युग पुरुष के विदा होने की मूक गवाही देते रहे। आमजन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक, हर कोई उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए पहुंचा।

पार्थिव शरीर को चिता पर रखने से पूर्व परंपरानुसार उसकी परिक्रमा कराई गई। जैसे ही उनका शरीर चिता पर रखा गया, वैसे ही मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, जैसे प्रकृति भी दिशोम गुरु की विदाई पर शोक प्रकट कर रही हो। बारिश के बावजूद हजारों लोग अंतिम दर्शन के लिए मौके पर डटे रहे। थोड़ी ही देर में चिता की अग्नि में दिशोम गुरु पंचतत्व में विलीन हो गए।
इससे पहले, दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए कई दिग्गज नेताओं का कारवां नेमरा पहुंचा। पूरे राज्य में शोक की लहर व्याप्त रही। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो, केंद्र एवं राज्य सरकार के मंत्री, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक एवं विधानसभा सचिवालय के अधिकारी-कर्मचारी सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
विधानसभा परिसर में भी शोकाकुल माहौल में दिवंगत नेता को पुष्पचक्र अर्पित किए गए। सभी गणमान्य व्यक्तियों ने शिबू सोरेन के संघर्षपूर्ण जीवन को याद किया। उन्होंने उन्हें झारखंड राज्य निर्माण आंदोलन का स्तंभ, आदिवासी अधिकारों का प्रतीक और सामाजिक न्याय का सशक्त प्रहरी बताया।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन झारखंड की राजनीति, समाज और आदिवासी चेतना के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। राज्य सरकार ने तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है, जिसके तहत सभी सरकारी कार्यालयों में झंडा आधा झुका रहेगा और सभी शासकीय कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं। झारखंड की माटी ने आज अपना सबसे बड़ा सपूत खो दिया, लेकिन दिशोम गुरु की विरासत, उनके आदर्श और उनके संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।
