रांची
राज्य सोरेन सरकार किस हद तक तुष्टीकरण की राजनीति में डूबी हुई है, यह उसके हर फैसले से साफ झलकता है। हाल ही में रामगढ़ में आफताब अंसारी नामक व्यक्ति की मृत्यु पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने इसे मॉब लिंचिंग करार देते हुए मृतक के परिजनों को 3 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा कर दी। लेकिन अब खुद स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया है कि उसकी मृत्यु पानी में डूबने से हुई थी, न कि मॉब लिंचिंग से। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या मंत्री जी ने बिना तथ्य जांचे मुआवजा घोषित किया? और क्या उनके द्वारा की गई मॉब लिंचिंग की बात महज एक राजनीतिक बयान थी?

इसके उलट, देवघर में बाबा बैजनाथ की पूजा कर लौट रहे कांवड़ियों की एक दुर्घटना में मृत्यु हो जाने पर सरकार ने मात्र 1 लाख रुपये की मुआवजा राशि घोषित की। यह भेदभावपूर्ण रवैया दर्शाता है कि राज्य सरकार की नजरों में एक श्रद्धालु कांवड़िया का कितना कम मूल्य है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वोटबैंक की राजनीति में हेमंत सरकार ने न्याय और संवेदनशीलता जैसे मूल्यों को तिलांजलि दे दी है।
