द फॉलोअप डेस्क:
करीब सात साल बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर शी जिनपिंग 18वें BRICS Summit में हिस्सा लेने नई दिल्ली पहुंच चुके हैं।वे शनिवार, 12 सितंबर दोपहर 12 बजे भारत पहुचें। इस दौरे की सबसे बड़ी वजह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी अहम द्विपक्षीय बैठक। भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में तनाव रहा है, ऐसे में इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर है।शी जिनपिंग इससे पहले 2019 में मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री मोदी से मिले थे। इसके बाद जून 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसके बाद LAC पर लंबे समय तक सैन्य तनाव रहा।हाल के समय में दोनों देशों ने सीमा के कुछ हिस्सों में तनाव कम करने के कदम उठाए हैं। अब मोदी-शी बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने, संवाद बढ़ाने और लंबित मतभेदों को संभालने पर चर्चा होने की उम्मीद है।

भारत और चीन के रिश्ते होंगे बेहतर
शी जिनपिंग BRICS Summit को संबोधित करेंगे और दूसरे नेताओं के साथ अंतरराष्ट्रीय स्थिति, BRICS के विस्तार और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे। BRICS Summit ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-अमेरिका तनाव जैसी बड़ी भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। चीन ने इन मुद्दों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति पर जोर दिया है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को BRICS की अध्यक्षता संभाली थी। नई दिल्ली Summit के बाद इसकी rotating chairmanship चीन के पास चली जाएगी। BRICS में अब ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं। 2026 में BRICS अपनी स्थापना के 20 साल भी पूरे कर रहा है। कुल मिलाकर, BRICS Summit जहां वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा का मंच बनेगा, वहीं मोदी-शी मुलाकात भारत और चीन के रिश्तों के लिए सबसे अहम घटनाओं में से एक होगी।