द फॉलोअप डेस्क:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया में चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने चेतावनी दी है कि अगर AI जैसी शक्तिशाली तकनीक गलत इरादे रखने वाले लोगों के हाथों में चली गई, तो इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर तबाही के लिए किया जा सकता है। गेट्स के मुताबिक, AI इतनी ताकतवर हो सकती है कि इसके गलत इस्तेमाल से ऐसी घटनाएं हो सकती हैं, जिनमें 100 करोड़ लोगों की जान तक जा सकती है। उन्होंने यह बात NBC के ‘Meet the Press’ कार्यक्रम के लिए दिए इंटरव्यू में कही है। गेट्स ने साफ किया कि उनका आशय यह नहीं है कि AI खुद अचानक इंसानों के खिलाफ हो जाएगी। उनकी चिंता यह है कि अगर बेहद शक्तिशाली AI टूल्स गलत इरादे रखने वाले लोगों के हाथ लग गए, तो वे साइबर हमले, जैविक हथियार या अन्य बड़े पैमाने के खतरों को अंजाम देने में मददगार बन सकते हैं। अगस्त में दिए एक इंटरव्यू और अपने लेख में भी गेट्स ने AI से जुड़े जोखिमों में बायोटेररिज्म, साइबर हमले और AI पर इंसानी नियंत्रण कमजोर पड़ने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था।

AI पर सिर्फ कंपनियों का कंट्रोल पर्याप्त नहीं: गेट्स
बिल गेट्स ने AI को लेकर सरकारी निगरानी और स्पष्ट नियमों की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि AI कंपनियों को अपने स्तर पर सुरक्षा तय करने के लिए छोड़ देना पर्याप्त नहीं है। गेट्स ने AI के ऐसे इस्तेमाल पर अनिवार्य समीक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियम बनाने की वकालत की है, खासकर उन क्षमताओं को लेकर जिनका इस्तेमाल जैविक हथियार विकसित करने या बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने में हो सकता है। उनके मुताबिक AI का खतरा सिर्फ भविष्य की आशंका नहीं है। जैसे-जैसे AI मॉडल ज्यादा स्वायत्त होते जा रहे हैं और खुद कई चरणों में काम करने में सक्षम हो रहे हैं, वैसे-वैसे यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि किसी AI सिस्टम को कितनी स्वतंत्रता दी जाए और उसके काम पर इंसानी निगरानी किस स्तर तक हो।
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ऑस्ट्रेलिया में AI एजेंट ने सरकारी पोर्टल में बनाई अनधिकृत पहुंच
बिल गेट्स की चेतावनी के बीच ऑस्ट्रेलिया से सामने आया एक मामला AI की बढ़ती क्षमता को लेकर नई चिंता पैदा कर रहा है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने 24 सितंबर को बताया कि OpenAI का एक AI एजेंट जून में ऑस्ट्रेलियाई सरकार के Medicare Statistics Reporting Service Portal में अनधिकृत तरीके से दाखिल हुआ था। यह पोर्टल Services Australia द्वारा संचालित है। सरकार के मुताबिक, AI मॉडल को ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल और हेल्थ स्टैटिस्टिक्स से जुड़ी जानकारी तलाशने का काम दिया गया था। जब पोर्टल ने कुछ जानकारी देने से इनकार किया, तो AI एजेंट ने दूसरे तरीके से उस जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश की और अनधिकृत पहुंच हासिल कर ली। ऑस्ट्रेलियाई उप प्रधानमंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने बताया कि यह किसी इंसान द्वारा किया गया हमला नहीं था, बल्कि AI मॉडल से जुड़े एजेंट की गतिविधि थी।
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कौन-सा डेटा एक्सेस हुआ? व्यक्तिगत मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित
ऑस्ट्रेलियाई सरकार के मुताबिक AI एजेंट ने सार्वजनिक और गैर-सार्वजनिक फाइलों तक पहुंच बनाई। इनमें मेडिकल खर्च और अन्य समेकित (aggregate) स्वास्थ्य आंकड़े शामिल थे। हालांकि, अभी तक ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है कि किसी व्यक्ति का निजी Medicare रिकॉर्ड या व्यक्तिगत मेडिकल डेटा एक्सेस किया गया हो। सरकार ने कहा है कि मामले की फोरेंसिक जांच जारी है। OpenAI ने भी कहा है कि आंतरिक समीक्षा के दौरान उसके मॉडलों की ऐसी गतिविधियां सामने आईं, जिनमें मॉडल ने कंपनी की मंशा के अनुरूप नहीं होने वाले कदम उठाए। कंपनी के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया की कई सरकारी वेबसाइटों के साथ मॉडल ने बातचीत की थी, लेकिन Medicare Statistics Reporting Service Portal में ही अनधिकृत पहुंच का मामला सामने आया।
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OpenAI ने कब दी सरकार को जानकारी?
इस मामले में सूचना देने में देरी को लेकर भी ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने गंभीर नाराजगी जताई है। सरकारी टाइमलाइन के अनुसार घटना 18 जून 2026 को हुई थी। OpenAI को अपनी आंतरिक समीक्षा के दौरान 11 अगस्त को इस गतिविधि का पता चला। इसके बाद 10 सितंबर को कंपनी ने Services Australia को ईमेल के जरिए घटना की जानकारी दी। Services Australia ने 11 सितंबर को ईमेल देखा और 15 सितंबर को ऑस्ट्रेलियाई साइबर सुरक्षा अधिकारियों को इसकी सूचना दी। प्रधानमंत्री अल्बनीज को 19-20 सितंबर के दौरान मामले की जानकारी मिली और 24 सितंबर को उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा की। अल्बनीज ने OpenAI CEO सैम ऑल्टमैन से फोन पर बात कर इस देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार को घटना की जानकारी बहुत पहले दी जानी चाहिए थी और जिस तरीके से कंपनी ने सूचना दी, वह भी स्वीकार्य नहीं था।
अब ऑस्ट्रेलिया करेगा मामले की जांच
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इस घटना की जांच के लिए एक रैपिड रिव्यू शुरू किया है। इसमें प्रधानमंत्री एवं कैबिनेट विभाग, ऑस्ट्रेलियन सिग्नल्स डायरेक्टोरेट, ऑस्ट्रेलियन AI सेफ्टी इंस्टीट्यूट और Services Australia शामिल हैं। जांच में यह देखा जाएगा कि मौजूदा कानून और सुरक्षा व्यवस्था AI से जुड़े साइबर मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि AI सिस्टम को एक सामान्य रिसर्च टास्क दिया गया था, लेकिन उस दौरान उसने ऐसी कार्रवाई की जिसे उसके डेवलपर ने जानबूझकर निर्देशित नहीं किया था। ऑस्ट्रेलियाई सरकार के मुताबिक घटना का वास्तविक प्रभाव सीमित था, क्योंकि व्यक्तिगत मेडिकल डेटा एक्सेस होने का कोई सबूत नहीं मिला है। लेकिन सरकार ने इसे AI के भविष्य के जोखिमों के लिहाज से गंभीर चेतावनी माना है।
AI को लेकर बढ़ रही वैश्विक चिंता
एक तरफ बिल गेट्स AI के गलत इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की आशंका जता रहे हैं, तो दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया की यह घटना दिखाती है कि AI एजेंट अब इंटरनेट पर सिर्फ जानकारी खोजने तक सीमित नहीं हैं। वे कई चरणों में काम कर सकते हैं और कुछ परिस्थितियों में ऐसे कदम भी उठा सकते हैं, जिनकी उम्मीद उनके डेवलपर ने नहीं की थी। इसी वजह से AI की क्षमताओं के साथ-साथ मानवीय निगरानी, साइबर सुरक्षा, जवाबदेही और स्पष्ट नियमन को लेकर दुनिया भर में बहस तेज हो रही है।