द फॉलोअप डेस्क
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मारांडी ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 6 बजे उठने के बाद जब उन्होंने अपना मोबाइल देखा, तो भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय का रात करीब 1:30 बजे किया गया ट्वीट नजर आया। इसके बाद सुबह 6 बजे समाचार एजेंसी ANI की जानकारी से पता चला कि रात करीब 1 से 1:30 बजे के बीच पुलिस-प्रशासन जयपाल सिंह स्टेडियम पहुंचा था। उनके अनुसार, वहां सिटी एसपी, एसएसपी और डीसी समेत कई अधिकारी मौजूद थे। प्रशासन धरने पर बैठे छात्रों को यह कहते हुए हटाने का प्रयास कर रहा था कि JPSC से जुड़ा मुद्दा सुलझ चुका है और अब धरना जारी रखने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, इस पूरे मामले में डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि वे छात्रों का हालचाल जानने के लिए वहां गए थे। उनकी तकलीफों को समझने गए थे। 
बिजली काटने का आरोप
बाबूलाल मारांडी ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने धरनास्थल की बिजली भी काट दी। हालांकि, छात्रों ने तुरंत अपने सहयोगियों और अन्य लोगों को फोन कर बुला लिया। भाजपा के प्रदेश महामंत्री अमर बावरी, भानु राज सिन्हा समेत कई अन्य लोग भी देर रात वहां पहुंच गए। इसके बाद पुलिस-प्रशासन धीरे-धीरे वहां से लौट गया।
सरकार पर लोकतांत्रिक आंदोलन दबाने का आरोप
उन्होंने कहा कि इस घटना से स्पष्ट होता है कि सरकार शांतिपूर्ण आंदोलन को भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। उनका कहना था कि छात्र भूख हड़ताल और धरने पर शांतिपूर्वक बैठे हुए हैं, ऐसे में उन्हें परेशान करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। सरकार ने यदि 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है, तो केवल इतना कर देने से छात्रों की मांग पूरी नहीं होती। 
CBI जांच ही छात्रों की प्रमुख मांग
उन्होंने कहा कि छात्रों की मुख्य मांग CBI जांच है। उनका आरोप था कि राज्य सरकार जिस CID से जांच करा रही है, उस पर छात्रों और झारखंड की जनता का भरोसा नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि CGL परीक्षा मामले में पहले SIT गठित की गई थी, लेकिन बाद में पूरी जांच टीम बदल दी गई। उनके अनुसार, इससे जांच की दिशा ही बदल गई और जिन लोगों पर गड़बड़ी के आरोप थे, उन्हें बचाने की कोशिश की गई।
फास्ट ट्रैक कोर्ट और हाई कोर्ट की निगरानी की मांग
उन्होंने कहा कि केवल परीक्षा रद्द करने से समाधान नहीं होगा। सरकार को CBI से जांच करानी चाहिए और हाई कोर्ट की निगरानी में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करना चाहिए। इससे जिन छात्रों के पास गड़बड़ी के सबूत हैं, वे खुलकर अपनी बात रख सकेंगे। जांच में जो दोषी होंगे, उन्हें सजा मिलेगी और जो निर्दोष होंगे, उन्हें राहत मिलेगी। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार को अपनी कार्रवाई पर भरोसा है, तो वह CBI जांच से क्यों डर रही है।.jpeg)
रात में कार्रवाई पर जताई आपत्ति
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को शांतिपूर्ण धरना और आंदोलन करने का पूरा अधिकार है। ऐसे में रात के अंधेरे में जाकर बिजली काटना और छात्रों को हटाने की कोशिश करना पूरी तरह अनुचित है। प्रशासन का काम आंदोलन समाप्त कराना नहीं, बल्कि वहां बैठे छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए।
आंदोलन पूरे राज्य में फैलने की चेतावनी
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने बलपूर्वक आंदोलन समाप्त करने की कोशिश की, तो इसकी चिंगारी पूरे झारखंड में फैल सकती है। छात्र राज्य के हर गांव और जिले से आते हैं, इसलिए यह आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि 10 अगस्त को जिस तरह बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए, वैसा अनुशासित और विशाल आंदोलन उन्होंने पहले कभी नहीं देखा।.jpeg)
सरकार को दी नसीहत
उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से अपील की कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों को चुनौती देने के बजाय उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। धरनास्थल पर बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं बनी रहें और किसी भी स्थिति में लाठीचार्ज या बल प्रयोग के जरिए आंदोलन समाप्त करने की कोशिश न की जाए।