जामताड़ा
जामताड़ा प्रखंड के गोपालपुर पंचायत स्थित शतसाल नीचे टोला में आजादी के दशकों बाद भी पक्की सड़क न बनने से नाराज ग्रामीणों ने 'रोड नहीं तो वोट नहीं' का एलान किया था। 'द फॉलोअप' द्वारा 23 जून को इस गंभीर समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया है। वहीं पूर्व विधायक सीता सोरेन ने इस खबर को अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर कर जामताड़ा उपायुक्त (DC) को टैग करते हुए मामले को संज्ञान में लेने का आग्रह किया था। इस पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए जामताड़ा DC ने जवाब दिया कि मामले को संज्ञान में लेकर संबंधित पदाधिकारी को आगे की कार्रवाई के लिए निर्देशित कर दिया गया है। करीब 600 की आबादी वाला शतसाल नीचे टोला आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। पक्की सड़क के अभाव में यह गांव विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह कटा हुआ है।

बरसात में गांव की स्थिति किसी नरक से कम नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि वे वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता के कारण अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने आगामी चुनाव में मतदान के बहिष्कार का फैसला लिया है। ग्रामीणों के अनुसार, मॉनसून की शुरुआत होते ही इस इलाके की स्थिति बेहद बदतर हो जाती है। गांव की कच्ची सड़क पूरी तरह दलदल और तालाब का रूप ले लेती है। बारिश के तीन-चार महीनों तक जिला मुख्यालय और आसपास के बाजारों से गांव का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। कीचड़ और जलजमाव के कारण पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। आपातकालीन स्थिति या बीमारी के वक्त मरीजों को अस्पताल ले जाना जान जोखिम में डालने जैसा होता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में गांव की स्थिति किसी नरक से कम नहीं रहती। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन के इस त्वरित निर्देश के बाद धरातल पर सड़क निर्माण का काम कब शुरू होता है और ग्रामीणों को इस नारकीय जीवन से कब मुक्ति मिलती है।