पटना/बिहार
बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच के प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को पद से हटाए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के औचक निरीक्षण के बाद हुई इस कार्रवाई के खिलाफ पटना निवासी विधिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रभाष चंद्र शर्मा ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, पीएमओ, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) सहित कई संस्थाओं को शिकायत भेजी है। शिकायत में कार्रवाई को तानाशाही और अन्यायपूर्ण बताया है। साथ ही डॉ. सिंह की ससम्मान तत्काल बहाली और 100 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की गई है।

चिकित्सा उपकरणों की अनियमितताओं का किया था खुलासा
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने पीएमसीएच में करोड़ों रुपये के चिकित्सा उपकरणों की कथित अनियमितताओं और जमाखोरी का खुलासा किया था, जिसके बाद उन्हें एक साजिश के तहत पद से हटाया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि बिना कारण बताओ नोटिस या विभागीय जांच के महज 24 घंटे के भीतर ही कार्रवाई कर दी गई। साथ ही स्वास्थ्य मंत्री के दौरे को भी पूर्व नियोजित बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं
वहीं, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का कहना है कि 23 जून को पीएमसीएच निरीक्षण के दौरान डॉ. सिंह अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे। इतना ही नहीं, फोन करने पर भी उनसे संपर्क नहीं हो सका था, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई की गई है। दूसरी ओर, डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने इसे अपने साथ अन्याय बताते हुए सरकार से न्याय की अपील की है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए भ्रष्टाचार, साजिश और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई जैसे सभी आरोप शिकायतकर्ता के दावे हैं। इस पर स्वास्थ्य मंत्री का बयान या आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।