द फॉलोअप डेस्क:
राजधानी पटना से सटे मनेर प्रखंड के किता 74 पूर्वी पंचायत के 76 गांव में सोन सोता पर करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से नवनिर्मित पुल के एप्रोच पथ में उद्घाटन से पहले ही बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। सड़क में लगातार बढ़ रही दरारों को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में अनियमितता और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते एप्रोच पथ को दुरुस्त नहीं किया गया तो सड़क का हिस्सा धंस सकता है। खासकर रात के समय दरारें दिखाई नहीं देने से बाइक और साइकिल सवारों के लिए दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों ने जताया भारी विरोध
दरारों की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी एप्रोच पथ की मरम्मत के लिए मौके पर पहुंचे थे। हालांकि, ग्रामीणों ने मरम्मत का विरोध करते हुए विभागीय कर्मियों को वहां से वापस भेज दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि सिर्फ ऊपर से दरारों की मरम्मत कर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि सड़क के नीचे की मिट्टी और आधारभूत संरचना की मजबूती की जांच जरूरी है। ग्रामीण संतोष कुमार, बिनोद राय, निरंतर कुमार नारायण समेत अन्य लोगों ने एप्रोच पथ की दोबारा ढलाई और दोनों ओर बोल्डर पिचिंग कराने की मांग की है, ताकि मिट्टी के कटाव और सड़क के धंसने की समस्या को रोका जा सके।

एप्रोच पथ में दरारें की हुई पुष्टि
वहीं, ग्रामीण कार्य विभाग, दानापुर के कार्यपालक अभियंता अरुण कुमार प्रभाकर ने एप्रोच पथ में दरारें आने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बाढ़ का पानी निकलने के बाद मिट्टी के सेटलमेंट यानी बैठने की वजह से यह समस्या हुई है। फिलहाल विभाग की ओर से एप्रोच पथ की मरम्मत कराई जा रही है। ग्रामीणों की बोल्डर पिचिंग की मांग पर कार्यपालक अभियंता ने कहा कि फिलहाल मरम्मत कराई जाएगी और विभागीय आदेश मिलने के बाद बोल्डर पिचिंग भी कराई जा सकती है। ऐसे में अब सवाल यह है कि करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से बने पुल के एप्रोच पथ में उद्घाटन से पहले आई दरारों का स्थायी समाधान कैसे होगा और निर्माण की गुणवत्ता की जांच कब होगी