बिहार
आज के डिजिटल युग में जहां इंटरनेट और सोशल मीडिया हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं, वहीं साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी का खतरा भी तेज़ी से बढ़ रहा है। चिंता की बात यह है कि मासूम स्कूली बच्चे अक्सर इन डिजिटल खतरों के आसानी से शिकार बन रहे हैं। इसी गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने एक बेहद सराहनीय और बड़ी पहल की है। बोर्ड ने न केवल छात्रों, बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों को भी डिजिटल दुनिया के खतरों से सुरक्षित रखने और उन्हें जागरूक बनाने के लिए एक व्यापक अभियान की शुरुआत की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सभी के लिए एक सुरक्षित और मजबूत डिजिटल माहौल तैयार करना है।
सुरक्षित डिजिटल व्यवहार की बढ़ती जरूरत
सीबीएसई ने स्कूलों को जारी निर्देश में कहा है कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध और सोशल मीडिया धोखाधड़ी के मामलों में भी भारी वृद्धि हुई है। ऐसे में विद्यार्थियों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए जागरूक करना बेहद आवश्यक हो गया है ताकि वे किसी भी प्रकार के ऑनलाइन खतरे से बच सकें। बोर्ड ने स्कूलों से कहा है कि वे विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा तैयार किए गए 2.5 घंटे के साइबर हाइजीन सर्टिफिकेशन कोर्स में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें। इस प्रशिक्षण के जरिए इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग और साइबर खतरों से बचाव की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी।
ऑनलाइन ठगी और सोशल मीडिया स्कैम पर रहेगा फोकस
इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है। इसके तहत मुख्य रूप से डिजिटल फ्रॉड और फिशिंग के अंतर्गत फर्जी लिंक और वेबसाइट्स की पहचान करना सिखाया जाएगा। साथ ही, इसमें बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़े OTP और पासवर्ड स्कैम, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर होने वाली विभिन्न धोखाधड़ी, और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करते हुए अपनी निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के तरीकों को शामिल किया जाएगा।
स्कूलों में सक्रिय होंगे 'साइबर क्लब'
विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने के लिए सीबीएसई ने स्कूलों को अपने साइबर क्लब सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं। इन क्लबों के माध्यम से छात्रों के बीच साइबर सुरक्षा से जुड़े व्यावहारिक ज्ञान, जागरूकता अभियानों और विभिन्न डिजिटल सुरक्षा गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। बोर्ड का मानना है कि साइबर सुरक्षा केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह सकती। इसके लिए शिक्षकों और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। जब घर और स्कूल दोनों जगह जागरूकता होगी, तभी बच्चों के लिए एक पूरी तरह सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार किया जा सकेगा।