Airport in Birpur:
बिहार के सुपौल जिले के बीरपुर एयरपोर्ट को पूर्ण रुप से विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य चल रहा है। एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने इस एयरपोर्ट को कोड-2बी श्रेणी के विमान संचालन के अनुकूल बनाने के लिए टेंडर जारी किया है। इस एयरपोर्ट के रनवे, टैक्सीवे और एप्रन के विकास के लिए 28.42 करोड़ का खर्च आएगा। इससे बुनियादी ढांचे का विकास होगा।
बीरपुर हवाईअड्डे के विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि।
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) July 21, 2026
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा बीरपुर हवाईअड्डे को Code-2B श्रेणी के विमान संचालन के अनुरूप विकसित किए जाने हेतु ₹28.42 करोड़ की लागत से रनवे, टैक्सीवे, एप्रन तथा अन्य आवश्यक एयरसाइड अवसंरचना के विकास की…
सीएम ने किया ट्वीट
सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया (X) पर इसकी जानकारी साझा करते हुए पोस्ट किया है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि 10 मार्च 2026 को जारी 36.38 करोड़ रुपये की निविदा, जिसके तहत प्री-फैब्रिकेटेड टर्मिनल भवन, प्री-इंजीनियर्ड एटीसी टावर, प्री-इंजीनियर्ड फायर स्टेशन तथा अन्य विमानपत्तन भवनों का निर्माण किया जाना है, जिसका कार्य भी संवेदक को आवंटित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि उड़ान (RCS-UDAN) योजना के तहत बीरपुर हवाईअड्डे के विकास पर कुल 64.80 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इस परियोजना से कोसी क्षेत्र में हवाई संपर्क मजबूत होगा। साथ ही क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

क्या होगा इसका फायदा?
सरकार का उद्देश्य सीमांचल औऱ कोसी क्षेत्र में हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना, बाढ़ के समय राहत कार्य चलाना और इसे एविएशन ट्रेनिंग हब बनाना है। वर्तमान में सुपौल, अररिया, मधेपुरा समेत सीमांचल के अन्य जिलों के यात्रियों को हवाई यात्रा के लिए पटना या बागडोगरा एयरपोर्ट का रुख करना पड़ता है। बीरपुर एयरपोर्ट से उड़ान सेवाएं शुरू होने के बाद लोगों का समय और यात्रा खर्च दोनों कम होंगे, साथ ही क्षेत्र की हवाई कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। इस एयरपोर्ट के विकास को भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित होने के कारण प्रशासनिक और रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके विकास से न केवल हवाई संपर्क मजबूत होगा, बल्कि स्थानीय व्यापार और उद्योग को भी नई गति मिलेगी। साथ ही पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, नए निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसके साथ ही आसपास के जिलों में सड़क, परिवहन तथा अन्य बुनियादी ढांचे के विकास को भी मजबूती मिलेगी।