पटना/बिहार
बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव होने हैं, जिसमें एक उपचुनाव शामिल है। चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं। सोमवार को नामांकन की अंतिम तिथि है। इसी बीच सबसे ज्यादा चर्चा RJD को लेकर है, जिसने अब तक अपना उम्मीदवार का नाम आधिकारिक तौर पर ऐलान नहीं किया है। हालांकि पूर्व विधान पार्षद सुनील सिंह का नाम प्रमुख दावेदार के रुप में सामने आ रहा है, जबकि रोहिणी आचार्या को लेकर भी अटकलें तेज हैं।

संख्या बल की चुनौती, सहयोगियों पर नजर
विधान परिषद चुनाव में जीत के लिए 28 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। ऐसे में विपक्षी गठबंधन के सामने संख्या बल की चुनौती बनी हुई है। RJD को अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस, एआईएमआईएम और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए विपक्षी खेमे से केवल एक उम्मीदवार के जीतने की संभावना जताई जा रही है। यही वजह है कि उम्मीदवार चयन को लेकर महागठबंधन बेहद सावधानी से कदम बढ़ा रहा है।

NDA ने खोले पत्ते, मुकाबला हुआ दिलचस्प
दूसरी ओर एनडीए ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुनावी मुकाबले को और रोचक बना दिया है। भाजपा ने पवन सिंह, डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित को मैदान में उतारा है। वहीं जदयू ने ललन प्रसाद, निशांत कुमार, भारती मंडल और शिवरानी देवी को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा चिराग पासवान की पार्टी ने अशरफ अंसारी पर दांव खेला है। उधर उपेंद्र कुशवाहा और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधान परिषद का यह चुनाव केवल सीटों की लड़ाई नहीं है, बल्कि बिहार की आगामी राजनीतिक दिशा और दलों की ताकत का भी बड़ा परीक्षण साबित होगा।