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बिहार में बदलेंगे उच्च शिक्षा के नियम, कॉलेज शिक्षकों की राजनीतिक गतिविधियों पर लगेगी रोक

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Bihar New Education policy:
बिहार सरकार अब राज्य में कॉलेज के शिक्षकों के राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने पर रोक लगाने की योजना बना रही है। सरकार मानसून सत्र में नई उच्च शिक्षा विधेयक लाने की तैयारी में है। इस विधेयक के जरिए डिग्री कॉलेजों के संचालन और शिक्षकों की नियुक्ति व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं। कानून लागू होने के बाद शिक्षक किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा का सार्वजनिक समर्थन और प्रचार-प्रसार या लेखन नहीं कर सकेंगे। डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की व्यवस्थाएं अलग-अलग होंगी। 

इन अधिनियमों में किए जाएंगे बदलाव
प्रस्तावित नए विधेयक के तहत राज्य के करीब 481 सरकारी डिग्री कॉलेजों को विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक नियंत्रण से हटाकर सीधे उच्च शिक्षा विभाग के अधीन किया जाना है। इससे विश्वविद्यालयों की भूमिका मुख्य रूप से पीजी शिक्षा और शोध तक सीमित रह जाएगी, जबकि स्नातक कॉलेजों का संचालन, प्रशासन और अन्य फैसले सरकार के स्तर से लिए जाएंगे। साथ ही शिक्षकों की नियुक्ति, तबादला, पदोन्नति और सेवा से जुड़े निर्णय भी उच्च शिक्षा विभाग के अधीन करने का प्रस्ताव है। इसके लिए सरकार पटना विश्वविद्यालय अधिनियम,1976 और बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम,1976 में संशोधन की तैयारी में है।

सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमों में भी बदलाव
सरकार सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमों में भी बदलाव की तैयारी में है। नए प्रस्ताव के मुताबिक, NET और पीजी डिग्री को न्यूनतम योग्यता रखने का प्रस्ताव है। वहीं पीएचडी को अनिवार्य योग्यता से हटा दिया जाएगा। इसके अलावा डिग्री कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक नए विधेयक के मुताबिक, विश्वविद्यालय में प्रोफेसर नहीं बन सकेंगे। अभी तक अनुभव और पदोन्नति के आधार पर यह अवसर मिलता था, लेकिन नया कानून लागू होने पर यह व्यवस्था खत्म हो जाएगी। साथ ही हर जिले में उच्च शिक्षा पदाधिकारी नियुक्त करने की योजना है, जो सरकारी डिग्री कॉलेजों की निगरानी करेंगे। विधेयक लागू होने पर कॉलेजों का संचालन अब सीधे सरकार के हाथों में होगी।

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