द फॉलोअप डेस्क
इन दिनों पूरे देश में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को लेकर चर्चाएं तेज हैं। निशांत कुमार की चर्चा इसलिए हो रही है क्यों कि स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद से ही वो पूरी तरह से बिहार की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाने को लेकर काम में जुट गये हैं। उन्होंने कहा है कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं की समस्या दूर करने के लिए 504 दवाइयाँ देने का लक्ष्य रखा गया है जिनमें अभी 350 तरह की दवाइयाँ दी जा रही हैं।

दवा की कंपोजिशन सही हो
इसके साथ ही दवा की कंपोजिशन सही हो इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी सरकारी अस्पताल से से दवा लेकर कोई भी दुकान से उसी दवाई को लेकर दोनों की लैब में कंपोजिशन टेस्ट करवाया जाए, जिससे पता चलेगा कि लोगों को हम जो दवा दे रहे हैं वह सही है या नहीं। वहीं उन्होंने आगे बताया कि अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि यदि दवा की उपलब्धता कम है तो इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दें। इसी प्रकार से सरकारी अस्पताल में यदि सीटी स्कैन, एमआरआई और एक्स-रे मशीन खराब है या टेक्नीशियन नहीं है तो इसकी जानकारी भी विभाग को दिया जाए।
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सड़क दुर्घटना के बाद घायलों को गोल्डन ऑवर के तहत बचाया जा सके
उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि मशीन 1 साल से अस्पताल में मशीन पड़ा हुआ है और उसे कोई चलाने वाला नहीं है। वहीं स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने सड़क दुर्घटना के बाद तुरंत एम्बुलेंस उपलब्ध करवाने के सवाल पर बताया कि फ़िलहाल स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे पर करीब 100 एम्बुलेंस चलाए जायेंगे ताकि सड़क दुर्घटना के बाद घायलों को गोल्डन ऑवर के तहत बचाया जा सके। इसके साथ ही 11 लेवल-3 की और 5 लेवल-2 की ट्रॉमा सेंटर बनाने का भी निर्णय लिया गया है।