द फॉलोअप डेस्क:
बिहार में उच्च शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऐलान किया है कि राज्य के 100 सहायक प्रोफेसरों को ऑक्सफोर्ड समेत दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। यह ट्रेनिंग एक महीने की होगी और इसका पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। सरकार का मकसद बिहार के शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षण व्यवस्था और कोर्स से परिचित कराना है, ताकि राज्य में विद्यार्थियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।मुख्यमंत्री रविवार को बापू सभागार में 211 नए डिग्री कॉलेजों में नवनियुक्त शिक्षकों के उन्मुखीकरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने उच्च शिक्षा में सुधार को लेकर यह घोषणा की। सीएम ने कहा कि 100 शिक्षकों का चयन किया जाएगा और उन्हें ऑक्सफोर्ड सहित दुनिया के बड़े विश्वविद्यालयों में भेजकर वहां की शिक्षण व्यवस्था और कोर्स से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
बापू सभागार, पटना में राज्य के 211 नवसृजित डिग्री महाविद्यालयों में 2,451 नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों के उन्मुखीकरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। बिहार एक दिन में 211 डिग्री कॉलेज शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बना है।
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) September 13, 2026
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार… pic.twitter.com/76tSWrjTQu
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बेहतर संस्थानों से जुड़ने के लिए शिक्षकों से मांगे जाएंगे सुझाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए दुनिया के अच्छे संस्थानों से जुड़ना जरूरी है। इसके लिए शिक्षकों से भी सुझाव लिए जाएंगे। अगर किसी शिक्षक को लगता है कि दुनिया में कोई ऐसा बेहतर संस्थान है, जिससे बिहार को जुड़ना चाहिए, तो वह इसकी जानकारी शिक्षा विभाग को दे सकता है। सरकार ऐसे 10 संस्थानों को चिन्हित करेगी, जिनसे बिहार सरकार अपने खर्च पर सीधे संवाद स्थापित करेगी। सम्राट चौधरी ने कहा कि एक समय बिहार में शिक्षा के विस्तार पर जोर दिया गया, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई से जुड़े। लेकिन अब सिर्फ विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा में क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों को साथ लेकर चलना होगा।

कॉलेजों में 75 फीसदी उपस्थिति होगी जरूरी
अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से जुड़ाव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने नए डिग्री कॉलेजों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक विद्यार्थी कॉलेज आकर पढ़ेंगे नहीं, तब तक संस्थानों का महत्व नहीं होगा। अधिकारियों और शिक्षकों को कॉलेजों में विद्यार्थियों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सीएम ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के लिए 75 फीसदी न्यूनतम उपस्थिति जरूरी होनी चाहिए। सरकार इस व्यवस्था की निगरानी के लिए भी काम करेगी। इसके साथ ही कॉलेजों में लाइव क्लास की व्यवस्था शुरू करने पर भी जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य के डिग्री कॉलेजों को खुले विश्वविद्यालय की मान्यता देने की दिशा में सरकार काम करेगी। इससे बिहार में उच्च शिक्षा के अवसरों का दायरा बढ़ाने में मदद मिलेगी।