द फॉलोअप डेस्क
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रदेश के 8053 पंचायतों के हर गांव में सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र खोलने का फैसला लिया। नीतीश कुमार की इस पहल से डेयरी क्षेत्र में क्रांति आ गई है। मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने सात निश्चय-3 के तहत 'कृषि के क्षेत्र में प्रगति-प्रदेश समृद्धि' संकल्प के अंतर्गत राज्य के प्रत्येक गांव में दुग्ध उत्पादन समिति गठित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी। जहां उन्होंने पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य दिलाने और उनकी आय बढ़ाने पर भी जोर दिया।
बताते चलें कि, राज्य में कुल 39,073 गांव हैं, जिनमें से 25,593 गांवों में पहले से ही दुग्ध उत्पादन समितियां काम कर रही हैं।

वहीं, शेष गांवों में अगले 2 वर्षों के भीतर समितियां बनाने का निर्देश पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग को दिया जा चुका है। इससे पशुपालकों को संगठित तरीके से दूध बेचने का अवसर मिलेगा। वहीं, मध्यस्थों की भूमिका भी कम होगी। हालांकि, सात निश्चय-2 के तहत सभी प्रखंडों में सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र पहले से ही स्थापित है। मुख्यमंत्री की इस पहल से नए सुधा दुग्ध बिक्री केंद्रों को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से जुड़ी जीविका दीदियों को आवंटित किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
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बिहार में डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने की यह योजना 'सफेद क्रांति' को नई गति देगी। पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा देकर राज्य आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से अग्रसर होगा, जिससे किसानों और ग्रामीणों का जीवन स्तर पहले से और बेहतर होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि डेयरी व्यवसाय के विस्तार से गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा। पशुपालकों की आय बढ़ने से ग्रामीण परिवारों की क्रय शक्ति मजबूत होगी। साथ ही दुग्ध उत्पादों की उपलब्धता बढ़ने से आम लोगों को पौष्टिक आहार आसानी से मिलेगा।