सारंडा और पोड़ाहाट के जंगल इन दिनों जैसे लंबी थकान के बाद कुछ थमे हुए नजर आते हैं. पहाड़ों पर पसरी धुंध, साल के पेड़ों से छनती धूप और सूखे पत्तों पर भागते कदमों के बीच अब गोलियों की गूंज भी पहले जितनी तीखी नहीं रह गई है. जिन जंगलों में कभी माओवादियों की स