झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने एक्स पर पोस्ट कर आगामी 'हूल दिवस' को भोगनाडीह में मनाने की घोषणा की है। उन्होंने अपने संदेश में आदिवासी अस्मिता और अस्तित्व पर मंडराते खतरों को उजागर करते हुए मौजूदा सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने एक्स पर पोस्ट कर आगामी 'हूल दिवस' को भोगनाडीह में मनाने की घोषणा की है। उन्होंने अपने संदेश में आदिवासी अस्मिता और अस्तित्व पर मंडराते खतरों को उजागर करते हुए मौजूदा सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए।
आज़ादी के बड़े आंदोलनों में से एक हूल क्रांति के महानायक सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो के उद्देश्यों को राज्य सहित पूरे देश के लोगों को आत्मसात करने की जरूरत है। उनके विचारों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मूल्यांकन कर अमर शहीदों की गाथा को उच्चतम स्तर पर
इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बरहेट प्रखंड अंतर्गत पचंकठिया बाजार स्थित शहीद स्थल में पूजा अर्चना की और पंचकठिया तोरण द्वार का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर निर्देश दिया कि तोरण द्वार और बेहतर और आकर्षक बनाया जाये। उन्होंने कहा कि तोरण द
झारखंड में आज (30 जून ) को हूल क्रांति दिवस मनाया जाएगा। झारखंड के आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ जिस दिन विद्रोह किया था उस दिन को हूल क्रांति का नाम से जानते है। बता दें कि इस युद्ध में करीब 20 हजार आदिवासियों ने शहादत दी थी।
हूल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शहीद सिदो- कान्हू की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। यह दिन अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आदिवासियों के विद्रोह, संघर्ष और उनके बलिदान को याद करने का विशेष दिन है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में राज्यवासियों स