डेस्क:
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की चीफ एग्जीक्यूटिव कमिटी (chief executive committee) ने मंगलवार को बैठक के बाद नियमों में बदलावों को मंजूरी दे दी। इन नियमों की सिफारिश सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) की अगुवाई वाली पुरुष क्रिकेट समिति ने की थी। पुरुष और महिला क्रिकेट में ये बदलाव 1 अक्तूबर से लागू होंगे। इसके साथ ही अब आस्ट्रेलिया में अगले महीने खेला जाने वाला टी20 क्रिकेट विश्व कप (T20 Cricket World Cup) नए नियमों के तहत खेला जाएगा।

ये बदलाव किए गए
• किसी बल्लेबाज के आउट होने के बाद नए बैटर के क्रीज में आने का समय कम हो गया है। अब उसे टेस्ट-वनडे में 2 मिनट के अंदर स्ट्राइक पर आना होगा। जबकि, टी20 इंटरनेशनल में यह समय 90 सेकंड तय किया गया है। पहले 3 मिनट मिलते थे। नए बल्लेबाज के समय पर न आने पर फील्डिंग टीम का कप्तान टाइम आउट की अपील कर सकता है।
• जब कोई बल्लेबाज कैच आउट होता है, तो नया बल्लेबाज स्ट्राइक में आएगा, भले ही बल्लेबाज कैच लेने से पहले एक दूसरे को पार हो गए हों। पहले यह नियम था कि कैच पकड़े जाने से पहले अगर बल्लेबाज एक-दूसरे को पार कर लेते थे तो दूसरे छोर पर खड़ा बल्लेबाज स्ट्राइक पर आ जाता था और नया बल्लेबाज नॉन स्ट्राइक पर रहता था।
• अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दो साल से अधिक समय से गेंद चमकाने के लिए लार के उपयोग पर प्रतिबंध लगा है। कोरोना महामारी आने के बाद इसे सुरक्षा के मद्देनजर लाया गया था, लेकिन अब इसे स्थायी रूप से लागू कर दिया गया है।
• यदि बल्लेबाज को बॉल तक पहुंचने के लिए पिच से बाहर आना पड़ रहा है। तो अंपायर कॉल होगा कि वह उसे डेड बॉल करार दे। यदि कोई बॉल बैटर को पिच से बाहर आने पर मजबूर करती है, तो अंपायर इसे नोबॉल करार देगा।

• गेंदबाजी के दौरान (रनअप) गेंदबाज कुछ अनुचित व्यवहार या जानबूझकर कुछ गलत मूवमेंट करता है, तो अंपायर एक्शन ले सकता है। वह बैटिंग टीम के खाते में 5 रन भी जोड़ सकता है। इसे डेड बॉल भी दिया जा सकता है।
• मांकडिंग को अमान्य कर दिया गया है। अब इसे रनआउट की श्रेणी में डाल दिया गया है।
• टी20 क्रिकेट में धीमी ओवर गति पर जुर्माने का नया प्रावधान लाया गया है। 2023 विश्व कप के बाद इसे वनडे में भी लागू किया जाएगा। इस नियम के अनुसार गेंदबाजी करने वाली टीम को निश्चित समय के अंदर अपना आखिरी ओवर शुरू करना होता है। अगर तय समय पर कोई टीम अपना आखिरी ओवर नहीं शुरू कर पाती तो उस समयसीमा के बाद जितने भी ओवर होते हैं, उनमें एक फील्डर बाउंड्री से हटाकर तीस गज के दायरे के अंदर रखना पड़ता है। इससे बल्लेबाजों को मदद मिलती है। फिलहाल यह नियम टी20 क्रिकेट में लागू है और अगले साल इसे वनडे में भी लाया जाएगा।
• अब सभी पुरुषों और महिलाओं के वनडे और टी20 मैचों में दोनों टीमों की सहमति होने पर हाइब्रिड पिचों का उपयोग किया जा सकेगा। वर्तमान में, हाइब्रिड पिचों का उपयोग केवल महिला टी20 मैचों में ही किया जा सकता है।