द फॉलोअप टीम, दिल्ली/ रांची :
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की रणनीति, समर्थन और प्रतिबद्धता के कारण ही टोक्यो ओलंपिक में भारत के खिलाड़ी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके हैं। प्रधानमंत्री ने सितंबर 2014 में टार्गेट ओलंपिक पोडियम स्कीम शुरू की, जिसे अप्रैल 2018 में संशोधित किया गया। इस स्कीम के तहत विदेशी प्रशिक्षण, अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता, उपकरण और कोचिंग शिविर आदि सुविधाएं सरकार खिलाड़ियों को दे रही है। कोर ग्रुप में चयनित खिलाड़ियों को 50,000 रुपये प्रति माह और विकास समूह को 25,000 रुपये प्रति माह भत्ता दिया जा रहा है। 2018-19 में 14,31,60,496 रुपयए, 2019-20 में 12,41,38,012 रुपए, 2020-21 में 15,65,86,361 रुपए और वर्तमान वित्तीय वर्ष 2021-22 मवं 4 अगस्त तक 12,48,66,670 रुपए खर्च किये गए हैं।यहजानकारी युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने राज्यसभा में दी है। वह राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के प्रश्न का जवाब दे रहे थे।

राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के प्रश्न का खेल मंत्री ने दिया लिखित उत्तर
लिखित उत्तर में अनुराग सिंह ठाकुर ने बताया कि ओलंपिक खेलों की उन खेल विधाओं में भारत ने पिछले एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीते। वहीं 2024 (पेरिस) और 2028 (लॉस एंजिल्स) के आगामी ओलंपिक खेलों में भारत की पदक जीतने की प्रबल संभावना है। प्रोत्साहित करने के लिए खेल विधाओं की उच्च प्राथमिकता श्रेणी बनाई गई है। इस समय 9 खेल विधाएं उच्च प्राथमिकता के रूप में वर्गीकृत की गयी हैं। जिनमें एथलेटिक्स, बैडमिंटन, हॉकी, निशानेबाजी, टेनिस, भारोत्तोलन, कुश्ती, तीरंदाजी और मुक्केबाजी शामिल हैंं। खेल संघों को प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने के लिए पर्याप्त फंड दिया जा रहा है। खेलों इण्डिया स्कीम के तहत लगभग 3000 युवा खिलाड़ियों को निरंतर सहायता दी जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में विजेताओं और उनके कोचों को विशेष नकद पुरस्कार, मेधावी खिलाड़ियों को पेंशन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय खिलाड़ी कल्याण कोष, राष्ट्रीय खेल पुरस्कार आदि दिए जा रहे हैं।
