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डॉ. कलाम के सहयोगी पद्म विभूषण से नवाजे गए वैज्ञानिक रोद्दम नहीं रहे, पीएम ने जताया शोक

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द फॉलोअप टीम,डेस्क
कभी दोनों मिलकर विज्ञान की अनसुलझी गुत्थियां सुलझाया करते थे। लेकिन अब दोनों ही न रहे। भारत रत्न  डॉ एपीजे अब्दुाल कलाम का निधन 27 जुलाई 2015 को शिलांग में हुआ था, तो महज पांच साल के भीतर ही एयरोस्पेस वैज्ञानिक पद्म विभूषण प्रो. रोद्दम नरसिम्हा ने आज बंगलेरु में अंतिम सांस ली। दोनों ने साथ मिलकर एक किताब लिखी थी, डेवलप्मेंट इन फ्लूइड मैकेनिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी। है। इसके आलवा प्रो. रोद्दम के नाम फ्लूइड मैकेनिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी पर 15 किताबें समेत 200 से अधिक रिर्सच पब्लिकेशन शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक ट्वीट कर कहा कि श्री रोद्दम नरसिम्हा ने भारत की ज्ञान और जिज्ञासा की सर्वश्रेष्ठस परंपरा को साकार किया है। वे उत्कृष्ट वैज्ञानिक थे, जो भारत की प्रगति के लिए विज्ञान और नवाचार की शक्ति का लाभ उठाने के बारे में उत्सुक थे। 

कई महत्वभपूर्ण पदों पर रहे
रोद्दम नरसिम्हा ने भारतीय विज्ञान संस्थान में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर तौर पर 1962 से 1999 सेवाएं दीं। नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज के निदेशक और जवाहरलाल नेहरू के इंजीनियरिंग यांत्रिकी इकाई के अध्यक्ष, जेएनसीएएसआर में डीएसटी ईयर-ऑफ-साइंस चेयर प्रोफेसर और हैदराबाद विश्वविद्यालय में साइंस एंड इंजीनियरिंग में प्रैट एंड व्हिटनी चेयर के अध्यक्ष भी रहे। 

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कई पदक से सम्मानित हुए
नरसिम्हा को 2013 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। वर्ष 2008 में उन्हें विकासशील देशों के लिए विज्ञान अकादमी, TWAS द्वारा ट्राइस्टे साइंस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। बता दें कि रोद्दम नरसिम्हा को ब्रेन हेम्ब्रेज के चलते 8 दिसंबर को बेंगलुरु के अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। इलाज के दौरान रात 8:30 बजे उनकी मौत हो गई।