द फॉलोअप टीम रांची
पलामू, गुमला, चतरा, खूंटी और सिंहभूम के बाद उग्रवादियों के पैर अब राजधानी तक पसर चुके हैं। क्या यह हमारी सुरक्षा व्यवस्था की चूक नहीं कि उग्रवादियों ने रांची स्थित राजभवन से कुछ ही दूरी पर धमकी भरे पोस्टर चिपका दिए हैं। यह पोस्टर रातू रोड न्यू मार्केट में चिकाए, तो लाल रंग का बैनर देवकमल अस्पताल की ओर से संचालित नगर निगम अस्पताल की दीवारों पर टांग दिया गया। हालांकि कोतवाली थाना पुलिस ने बैनर और पोस्टर तो हटा दिया है। लेकिन सवाल तो है कि ऐसा हो कैसे रहा है। थाना प्रभारी के बकौल सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि दोषियों का पता चल सके। आखिर इतनी हिम्मत किसकी और कैसे हो गई।
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जांच में जुटी पुलिस, खंगाले जा रहे सीसीटीवी फुटेज
कारणों का पता तो जांच से ही चलेगा, जिसमें पुलिस जुट गई है। विवादित बैनर में दर्ज इबारत यह थी। एनआईए और पुलिस प्रशासन के दलाल दलाली करना बंद करें। सीसीएल एनटीपीसी के अधिकारी विस्थापित प्रभावित आम जनता को धौंस, धमकी, मारपीट, गाली- गलौज करना बंद करें। जल, जंगल, जमीन से बेदखल करने वाली शिखंडी सरकार के खिलाफ अपने हक-अधिकार के लिए मजदूर-किसान एकजुट हों। विस्थापन नीति से जनता बेहाल है।