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पहले मंत्री और अब विधायकी की शपथ, ऐसा करने वाले झारखंड के पहले नेता बने हफीजुल हसन अंसारी

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द फॉलोअप टीम, रांची: 
झारखंड के अल्पसंख्यक कल्याण, युवा, खेलकूद और पर्यटन मंत्री हफीजुल हसन अंसारी ने विधायक पद की शपथ ली। हफीजुल हसन अंसारी पहले मंत्री बन गये जिन्होंने मंत्रीपद की शपथ पहले ली और बाद मं विधायक बने। हफीजुल ने पांच फरवरी को मंत्रीपद की शपथ ली थी। अब 8 मई को उन्होंने विधायक पद की शपथ ली। हफीजुल मधुपुर उपचुनाव जीतकर विधायक बने हैं। 

2006 में हेमेंद्र प्रताप शाही ने ली थी शपथ
साल 2006 में भानु प्रताप शाही के जेल जाने की वजह से उनके पिता हेमेंद्र प्रताप शाही ने मंत्रीपद की शपथ ली थी। वे विधायक नहीं बने थे। इस बीच भानु प्रताप शाही जेल से बाहर आये तो हेमेंद्र ने उनके हक में कुर्सी छोड़ दी। उन्होंने विधायकी का चुनाव नहीं लड़ा। ऐसे में हफीजुल झारखंड के पहले ऐसे मंत्री बन गये हैं जिन्होंने पहले मंत्रीपद की शपथ ली और बाद में विधायकी की। 

अर्जुन मुंडा और बाबूलाल मरांडी का इतिहास
भारतीय जनता पार्टी के दो नेता बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा भी ऐसे शख्स हैं जिन्होंने बाद में विधायकी की शपथ ली। हालांकि इस मामले में दोनों मंत्री नहीं बल्कि मुख्यमंत्री बनाये गये थे। साल 2000 में झारखंड गठन के तुरंत बाद बाबूलाल मरांडी को मुख्यमंत्री बनाया गया। उस वक्त वो लोकसभा सांसद थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद वो विधायक बने। इस प्रकार अर्जुन मुंडा 2010 में सांसद रहते हुए मुख्यमंत्री बने। बाद में विधायकी जीती और शपथ ग्रहण किया। शिबू सोरेन भी बिना विधायक बने मुख्यमंत्री बने थे लेकिन तमाड़ विधानसभा सीट से चुनाव हार गये थे। 

मधुपुर उपचुनाव जीते हैं हफीजुल हसन अंसारी
गौरतलब है कि पूर्व मंत्री हाजी हुसैन अंसारी का बीते साल नंवबर महीने में निधन हो गया था। वे मधुपुर विधानसभा सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक थे। निधन से खाली हुई सीट पर छह महीने में उपचुनाव करवाना था। झामुमो ने बड़ा दांव चला और हाजी हुसैन अंसारी के बेटे हफीजुल हसन अंसारी को मंत्री बना दिया। मधुपुर सीट से प्रत्याशी भी घोषित कर दिया। बीजेपी ने नियमित प्रत्याशी राज पालिवार का टिकट काटा। इस सीट से गंगा नारायण सिंह को उम्मीदवार बनाया। चुनाव में गंगा नारायण सिंह की हार हो गयी। हफीजुल जीते और विधायकी की शपथ ली।