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जामताड़ा में जर्जर पुल पर जोखिम भरा सफर, प्रशासन की चेतावनियां बेअसर

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जामताड़ा 
पुल पार करना आपकी अपनी जिम्मेदारी है—सरकार की नहीं! दरअसल, ये मैं नहीं कह रहा हूं। तस्वीर में आप जो पुल देख रहे हैं, जामताड़ा और देवघर को जोड़ने वाले उस पुल पर साफ लिखा है कि इस पुलिया से जो भी पार होगा वो खुद इसका जिम्मेदार होगा। पुल पर लिखा 'DANGER' का निशान और 'आपका हितैषी' वाली चेतावनी यह बताने के लिए काफी है कि यहाँ का सिस्टम शायद गहरी नींद में है। आखिर कब तक लोग अपनी जान हथेली पर लेकर सफर करेंगे? यह जामताड़ा है, यहाँ सब कुछ चलता है"—यह कहावत आज सदर प्रखंड के दक्षिण बहाल पंचायत में चरितार्थ होती दिख रही है। प्रशासन द्वारा 'डेंजर ज़ोन' घोषित किए जाने और सुरक्षा घेरा बनाए जाने के बावजूद, यहाँ के लोग अपनी जान जोखिम में डालकर एक ध्वस्त पुल का उपयोग कर रहे हैं।बाढ़ ने छीनी थी रफ्तार, अब लापरवाही बढ़ा रही खतरा
गौरतलब है कि पिछले वर्ष इसी महीने में आई भीषण बाढ़ के कारण जामताड़ा से देवघर को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण पुल का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह टूट गया था। हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पुल के दोनों ओर ऊंची दीवारें खड़ी कर दी थीं और साइन बोर्ड लगाकर इसे प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया था।
दीवारें तोड़कर बनाया जा रहा रास्ता
हैरानी की बात यह है कि स्थानीय लोगों ने अपनी सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा बनाई गई दीवारों को ही तोड़ दिया है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग, बाइक सवार और राहगीर इसी जर्जर हिस्से से होकर गुजर रहे हैं। लोगों का तर्क है कि वैकल्पिक मार्ग लंबा है, लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि यह 'शॉर्टकट' उनकी जिंदगी का आखिरी रास्ता साबित हो सकता है।
हो चुका है बड़ा हादसा, फिर भी नहीं खुली आँखें
इसी लापरवाही का नतीजा कुछ समय पहले एक भीषण कार दुर्घटना के रूप में सामने आया था। उस हादसे में परिवहन विभाग के एक कर्मी की दुखद मौत हो गई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस दर्दनाक घटना के बावजूद लोगों के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है।
धीमी निर्माण गति से ग्रामीणों में आक्रोश
वर्तमान में यहाँ नए पुल का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य की गति अत्यंत धीमी है। निर्माण में हो रही देरी और सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी ने स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। प्रशासन को जहाँ निर्माण कार्य में तेजी लाने की जरूरत है, वहीं आम जनता को भी यह समझने की आवश्यकता है कि नियमों का उल्लंघन कर वे किसी और को नहीं, बल्कि खुद को मौत के मुँह में धकेल रहे हैं।
 

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