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कोविड के महमारी के बाद आ सकती है लंग्स फायब्रोसिस की 'सुनामी', सरकार को करनी चाहिए पूरी तैयारी

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द फॉलोअप टीम, दिल्ली
इंडियन चेस्ट सोसायटी ने ये चेताया है, कि 10 से 15% कोविड मरीज़ों में फेफड़े की बीमारी है और गम्भीर स्थिति में ये बीमारी हार्ट की पम्पिंग पर असर करती है।'Post‐COVID lung fibrosis: The tsunami that will follow the earthquake' शीर्षक से यह रिव्यू पेपर छपा है। कोरोना के साईलेंट अटैक ने फेफड़ों की कोशिकाओं को घातक चोट पहुंचाई है। ‘इंडियन चेस्ट सोसाइटी' जर्नल में छपे इस रिव्यू पेपर में  कहा गया है, कि कोविड के ‘भूकंप' के बाद पोस्ट-कोविड लंग्स फायब्रोसिस ‘सुनामी' की तरह हो सकती है। बता दें, कि लंग्स फाइब्रोसिस बीमारी में फेफड़ों के अंदर मौजूद टिश्यू सूजने लगते हैं, जिससे ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इससे खून का बहाव शरीर में कम होने लगता है। स्थिति गम्भीर हुई तो दिल ढंग से काम नहीं करता। नतीजा मल्टी ऑर्गन फेल्योर, हार्ट अटैक या गंभीर अवस्था में मौत भी हो सकती है। माना गया है, की लम्बे समय तक आईसीयू, वेंटिलेटर पर रहे मरीज़, बुज़ुर्ग, धूम्रपान और शराब का सेवन करने वालों को अधिक प्रभावित करता है। डॉक्टर ने बताया कि, ‘सीटी स्कैन पर अगर आप लंग्स के फ़्रेम देखेंगे, तो उनमें डैमेज आपको नज़र आएगी। पोस्ट कोविड नेमोनयटिस जो डेवेलप होता है, देखा जा सकता है। ये असर मरीज़ों में कुछ समय तक दिखता है। उन्होंने कहा कि इसका हार्ट पर असर होता है। हार्ट की पम्पिंग कम होती है। रिव्यू पेपर में रिकवर होने के लिए वक़्त पर कई दवाइयों के साथ होम ऑक्सीजन थेरेपी, चेस्ट फिजियोथेरेपी, अच्छे पोषण जैसे कई उपाए समझाए गए हैं।

केन्द्र के साथ साथ राज्य सरकार को भी करनी चाहिए तैयारी
भारत में अबादी को देखकर ये कहा जा रहा है, कि अगर राज्य सरकार के साथ साथ केन्द्र सरकार इसको लेकर अपनी तैयारी अभी से शुरू नहीं करती है, तो बाद में स्थिति को नियत्रण कर पाना मुश्किल होगा। सरकारी अस्पतालों के साथ नीजी अस्पतालों में भी इतनी सुविधा होनी चाहिए, ताकी अधिक से अधिक मरीजों का जरूरत पड़ने पर इलाज किया जा सके।

अपनी याददाश्त पर दें ध्यान 
कोरोना संक्रमण का असर ब्रेन हेल्थ पर भी पड़ता है। इस कारण कुछ लोगों में चीजों को याद ना रख पाने की समस्या देखने को मिलती है। इस समस्या से बचने के लिए आप हर दिन कुछ ऐसे गेम्स खेलें, जिनसे आपके ब्रेन की एक्सर्साइज हो। जैसे लूडो, चेस, सुडोकू, याददाश्त से जुड़े कुछ मोबाइल गेम्स।  

शरीर के ऑक्सीजन लेवल का ध्यान रखें
कोरोना एक ऐसा संक्रमण है, जो ठीक होने के बाद भी कई-कई महीनों बाद तक उसके आफ्टर इफेक्ट्स आपके शरीर पर दिख सकते हैं। जैसे  फेफड़ों से जुड़ी समस्या, किडनी से जुड़ी बीमारी, लिवर का खराब होना, सिर में दर्द रहना इत्यादि। खासतौर पर सांस का छोटा होना, सीने में जकड़न का अहसास होना, अचानक से सिर चकराना, अचानक पसीना-पसीना हो जाना। इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर लापरवाही ना करें। 

डायट में पोषक तत्वों का ध्यान रखें
कोरोना से ठीक होने के बाद आपको अपनी डायट में प्रोटीन की अधिक मात्रा का उपयोग करना चाहिए। इसके लिए आप हर दिन दाल का सूप, हरी फलियां और अंडे का सेवन कर सकते हैं।

कम से कम आठ गिलास पानी पिएं
हर दिन कम से कम 8 गिलास पानी पिएं, एक मुट्ठी नट्स और कम से कम कोई एक फ्रूट जरूर खाएं। एक साथ पेट भरकर भोजन करने की जगह थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार खाएं। 

रोज करें हल्की-फुल्की एक्सर्साइज
कोरोना को हराने के बाद आपको हर दिन कम से कम 30 मिनट की वॉक जरूर करनी चाहिए। यदि आप वॉक नहीं कर पाएं तो नियमित रूप से हल्की एक्सर्साइज और लाइट योग जरूर करें। ताकि शरीर के अंदर रक्त का प्रवाह सुचारू रूप से बना रहे।