नई दिल्ली
कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज शुक्रवार को जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्र साहिल लोचाब को साथ लेकर संसद मार्ग थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस से पैलेट गन से घायल हुए छात्र की शिकायत पर FIR दर्ज करने की मांग की। FIR दर्ज नहीं होने पर राहुल गांधी थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। उनके साथ घायल छात्र साहिल की मां, परिजन और वकील भी मौजूद रहे।
On 14th, Sahil Lochav went with his lawyers to Delhi Police and gave a written complaint. They refused to give a I/O number.
— Congress (@INCIndia) August 21, 2026
It was again pursued on 17th with email, phone as well. Again, no I/O number given. No acknowledgement was also given.
Now, LoP @RahulGandhi ji went… pic.twitter.com/PVEXNZXGWk
पैलेट गन मामले में FIR की मांग
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्र की शिकायत पर पुलिस ने अब तक FIR दर्ज नहीं की है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मामले में कार्रवाई करने की मांग की। राहुल के थाने पहुंचने के बाद उन्होंने DCP से भी मुलाकात की। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, पीड़ित की शिकायत पहले ही दर्ज की जा चुकी है। पुलिस ने कहा कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दर्ज सभी मामलों की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है। साहिल की शिकायत को भी क्राइम ब्रांच को भेजा जाएगा। 
20 जुलाई के प्रदर्शन में घायल हुआ था साहिल
19 वर्षीय साहिल लोचाब दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ का रहने वाला है और दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग का छात्र है। 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। इसी दौरान साहिल की दाहिनी आंख में गंभीर चोट लगी थी। साहिल को AIIMS के जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उसकी आंख की सर्जरी की गई। परिवार का दावा है कि डॉक्टरों ने घायल आंख की रोशनी वापस आने की संभावना करीब 1 प्रतिशत बताई है।.jpeg)
पहले भी पुलिस से शिकायत कर चुका था छात्र
परिवार के मुताबिक, साहिल 14 अगस्त को वकीलों के साथ दिल्ली पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने पहुंचा था। आरोप है कि उसे शिकायत का I/O नंबर नहीं दिया गया। इसके बाद 17 अगस्त को ईमेल और फोन के जरिए भी पुलिस को शिकायत की जानकारी दी गई, लेकिन शिकायत की रसीद नहीं मिलने का आरोप है।
संसद में भी उठा था पैलेट गन का मुद्दा
राहुल गांधी ने 29 जुलाई को संसद में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन और गोली चलाने की अनुमति दी गई। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों को गंभीर और निराधार बताया था। उन्होंने राहुल से अपने बयान पर माफी मांगने की मांग की थी। राहुल के भाषण के दौरान इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को लेकर भी सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया।.jpeg)
20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की कमेटी
संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया है। कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। कमेटी में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शलिंदर कौर, CBI के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड DGP डॉ. एलआर बिश्नोई शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस ने संसद मार्च को बताया था गैरकानूनी
18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा था कि 20 जुलाई का संसद मार्च बिना अनुमति आयोजित किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की। पुलिस ने दावा किया कि हालात को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया गया और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया गया।
पैलेट गन को लेकर क्या हैं नियम?
भारत में पैलेट गन पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है। गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत इसके इस्तेमाल के लिए SOP निर्धारित है। सरकार इसे कम घातक हथियार मानती है, जिसका इस्तेमाल हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अंतिम विकल्प के तौर पर किया जाना चाहिए। इसके इस्तेमाल में आम लोगों और सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश हैं।
36 दिन चला था प्रदर्शन
नीट पेपर लीक के विरोध में CJP का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन 20 जून से शुरू हुआ था। प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल भी की थी। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए। 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन खत्म होने की बात कही गई थी। कुल मिलाकर यह प्रदर्शन करीब 36 दिनों तक चला।