द फॉलोअप डेस्क
ओडिशा की उपमुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) प्रभाती परिड़ा ने महिला और बाल विकास विभाग (Women and Child Development Department) के कामकाज की समीक्षा की। बैठक में तय किया गया कि सभी 30 जिलों में महिला आर्थिक सशक्तीकरण (Women’s Economic Empowerment) की रूपरेखा (Framework) लागू की जाएगी। इसके जरिए रोजगार (Employment), उद्यमिता (Entrepreneurship) और कार्यबल (Workforce) में महिलाओं की भागीदारी (Women’s Participation) पर नजर रखी जाएगी। साथ ही महिलाओं और बच्चों के विकास (Women and Child Development) से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने और सरकारी योजनाओं (Government Schemes) का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए जल्द ही चार प्रमुख विषयों पर राज्यस्तरीय सम्मेलन (State-Level Conference) आयोजित किया जाएगा। बैठक में विभाग की कार्ययोजना (Action Plan) पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल (Coordination), काम में तेजी और योजनाओं की नियमित निगरानी (Regular Monitoring) पर जोर दिया गया।
.jpeg)
राष्ट्रीय सम्मेलन के निष्कर्षों के आधार पर तय किए गए विषय
ये लक्ष्य 8 और 9 अक्टूबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के निष्कर्षों के आधार पर तय किए गए हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का लाभ महिलाओं और बच्चों तक सही तरीके से पहुंचाने के लिए समयसीमा के भीतर काम करना और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है। ओडिशा सरकार ने चार प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। इनमें पोषण और छोटे बच्चों का शुरुआती विकास, मिशन वात्सल्य के तहत बाल संरक्षण, महिला सुरक्षा और महिला सशक्तीकरण शामिल हैं।

भोजन की गुणवत्ता सुधारी जाएगी
पोषण और बच्चों के शुरुआती विकास के लिए घर ले जाने वाले राशन और पके हुए भोजन की गुणवत्ता सुधारी जाएगी। पोषण ट्रैकर के जरिए बच्चों के पोषण की निगरानी होगी। गंभीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों की जल्द पहचान कर उन्हें इलाज के लिए भेजा जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों के अनुकूल बनाने और वहां शुरुआती शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर दिया जाएगा। बाल संरक्षण के क्षेत्र में बच्चों की देखभाल के लिए परिवार आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा। अनाथालयों पर निर्भरता कम करने के साथ बच्चों को परिवार जैसा माहौल देने, संस्थानों से बाहर आने वाले बच्चों के पुनर्वास और उन्हें आगे भी सहायता उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा।
