द फॉलोअप डेस्क
ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ देशव्यापी बंद का असम में असर दिखाई दे रहा, लेकिन साथ ही फार्मा संसथाओं में में फूट भी दिख रही है। ऑल इंडिया ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) द्वारा दवाओं की ऑनलाइन बिक्री और बड़े कॉर्पोरेट खिलाड़ियों द्वारा कीमतों में भारी कटौती के खिलाफ बंद पर बुधवार को पूरे असम में मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। मिली खबर में कहा गया है कि इस बंद का असम में AIOCD से जुड़ी संस्था, केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ़ असम (CDAA) ने समर्थन किया था, जिसके चलते राज्य के कई हिस्सों में दवा की दुकानें बंद रहीं। हालांकि, जोरहाट सहित कई जिलों में स्थानीय व्यापारी संगठनों के विरोध के चलते कुछ फार्मेसियां आंशिक रूप से खुली रहीं।

CDAA के सदस्यों ने पानबाजार में प्रदर्शन किया
गुवाहाटी में, CDAA के सदस्यों ने पानबाजार में प्रदर्शन किया। उन्होंने ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म पर सख्त नियम लागू करने, कोविड-19 महामारी के दौरान 26 मार्च, 2020 को जारी GSR 220 अधिसूचना को वापस लेने, और कॉर्पोरेट फार्मेसी चेन द्वारा कथित तौर पर अपनाई जा रही भारी छूट देने की प्रथाओं के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि दवाओं की बेरोकटोक ऑनलाइन बिक्री से नकली और नशीली दवाओं के प्रसार को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे जन स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो गया है। AIOCD की गुवाहाटी इकाई के सचिव हलाधर डेका ने कहा, "इस हड़ताल का मुख्य उद्देश्य दवा व्यापार पर निर्भर लगभग पांच करोड़ लोगों की आजीविका की रक्षा करना और उनके परिवारों को आर्थिक संकट से बचाना है।"
हालांकि, एसोसिएशन ने बताया कि आपातकालीन स्थितियों के लिए सीमित संख्या में फार्मेसियां खुली रखी गई थीं।

अस्पतालों के पास तीन से चार आउटलेट
संगठन के एक सदस्य ने कहा, "हमने हर जिले में पांच से छह फार्मेसियां, और अस्पतालों के पास तीन से चार आउटलेट खुले रखे हैं, ताकि विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।" CDAA ने एक "अमान्य संगठन" पर भी आरोप लगाया कि वह इस बंद का विरोध करके और कथित तौर पर गलत जानकारी फैलाकर दवा व्यापारियों को बांटने की कोशिश कर रहा है। एसोसिएशन ने दावा किया कि यह समूह ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म और उन कॉर्पोरेट संस्थाओं से जुड़ा हुआ है, जिन पर कीमतों में भारी कटौती करने की प्रथाओं का आरोप है। हालांकि, इस बंद को असम के दवा व्यापारियों का सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिला।
