गढ़वा/पलामू:
Garhwa News: पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम ने कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है, संविधान सर्वोपरि है और जनता का जनादेश सर्वोपरि है। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस से जनता के फैसले का सम्मान करने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सत्ता प्राप्त करना ही एकमात्र उद्देश्य नहीं, बल्कि जनता के निर्णय को स्वीकार करना भी लोकतांत्रिक मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारत में राजनीतिक बदलाव का रास्ता संवैधानिक व्यवस्था, जनमत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होकर गुजरता है।

लोकतंत्र के नाम पर अराजकता उचित नहीं
विष्णु दयाल राम ने कहा कि छात्रों के हितों, चुनाव सुधार और लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच जब ‘सत्ता परिवर्तन’ और बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरणा लेने जैसे बयान सामने आते हैं, तो आंदोलन की दिशा, उद्देश्य और राजनीतिक मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि भारत एक सशक्त लोकतांत्रिक देश है, जहां प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल को विरोध करने, अपनी बात रखने और सरकार से सवाल पूछने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। हालांकि, इन अधिकारों का इस्तेमाल संवैधानिक मर्यादाओं, लोकतांत्रिक परंपराओं और शांतिपूर्ण राजनीतिक प्रक्रिया के दायरे में होना चाहिए। लोकतंत्र के नाम पर ऐसी राजनीति को उचित नहीं ठहराया जा सकता, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनता के विश्वास को नुकसान पहुंचे।

राहुल गांधी और कांग्रेस जनादेश का सम्मान करें
सांसद ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस को जनता के जनादेश का सम्मान करना चाहिए। चुनाव में हार-जीत लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है। चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन ऐसे सवालों के समर्थन में ठोस तथ्य प्रस्तुत करना और संवैधानिक संस्थाओं एवं कानूनी प्रक्रियाओं पर भरोसा बनाए रखना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता के फैसले को सर्वोपरि मानने वाली व्यवस्था है। किसी भी राजनीतिक दल या नेता को यह नहीं भूलना चाहिए कि सत्ता का वास्तविक स्रोत देश की जनता है और उसके निर्णय का सम्मान करना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
.jpeg)
संविधान का सम्मान आचरण से साबित होता है
विष्णु दयाल राम ने कहा कि संविधान को हाथ में लेकर चलना और उसके मूल्यों का वास्तविक सम्मान करना दो अलग-अलग बातें हैं। संविधान की भावना का सम्मान केवल नारों और भाषणों से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक आचरण, संवैधानिक मर्यादाओं और नागरिक अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता से साबित होता है। कांग्रेस के शासनकाल में लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह अध्याय आज भी याद दिलाता है कि लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कथनी और करनी में समानता जरूरी है।
.jpeg)
राजनीतिक विरोध संवैधानिक दायरे में हो
सांसद ने कहा कि राहुल गांधी को सरकार का राजनीतिक विरोध करने, जनहित के मुद्दे उठाने और लोकतांत्रिक तरीके से जवाबदेही तय करने का पूरा अधिकार है। लेकिन राजनीतिक विरोध और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने के बीच की सीमा को समझना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे परिपक्व लोकतंत्र में राजनीतिक परिवर्तन का रास्ता जनता के मत, संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होकर गुजरता है, न कि अराजकता या अस्थिरता से। लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और जनता का विश्वास बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी है।
राष्ट्रहित और जनादेश सर्वोपरि
विष्णु दयाल राम ने कहा कि भारत का लोकतंत्र जनता की शक्ति, संविधान की गरिमा और जनादेश की सर्वोच्चता पर आधारित है। राष्ट्रहित को राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर रखना, संविधान की मर्यादा बनाए रखना और जनता के फैसले का सम्मान करना ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है। उन्होंने दोहराया कि राष्ट्रहित सर्वोपरि, संविधान सर्वोपरि और जनता का जनादेश सर्वोपरि होना चाहिए।