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विझिंजम पोर्ट बना भारत का नया समुद्री गेटवे, 2.3 मिलियन TEUs का आंकड़ा पार; 5.7M क्षमता की तैयारी

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तिरुवनंतपुरम:
केरल का विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट तेजी से भारत के प्रमुख ट्रांसशिपमेंट और समुद्री व्यापार केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। अडानी पोर्ट्स एंड लॉजिस्टिक्स की ओर से प्रस्तुत जानकारी के मुताबिक, रणनीतिक रूप से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट के बेहद करीब स्थित यह बंदरगाह भारत के दक्षिणी हिस्से के लिए एक महत्वपूर्ण गेटवे बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पोर्ट अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से करीब 10 नॉटिकल मील की दूरी पर है और इसका प्राकृतिक गहरा ड्राफ्ट 18 से 20 मीटर है।

1,100 से ज्यादा जहाज और 23 लाख से अधिक TEUs का संचालन
प्रस्तुति के अनुसार, विझिंजम पोर्ट अब तक 1,100 से अधिक जहाजों को संभाल चुका है और यहां 2.3 मिलियन से अधिक TEUs का संचालन किया जा चुका है। पोर्ट की नाममात्र परियोजना क्षमता करीब 1 मिलियन TEUs प्रतिवर्ष बताई गई है, जबकि प्रस्तुति में 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता उपयोग का उल्लेख किया गया है। बंदरगाह ने बड़े कंटेनर जहाजों के संचालन में भी अपनी क्षमता साबित की है। अब तक 80 से अधिक Ultra Large Container Vessels (ULCV) संभाले जा चुके हैं। इनमें 20,000 से ज्यादा TEU क्षमता और करीब 399 मीटर लंबाई वाले जहाज शामिल हैं। मई 2026 में ही ऐसे सात बड़े जहाजों को संभालने की बात प्रस्तुति में कही गई है।

MSC Irina के साथ बनाया बड़ा रिकॉर्ड
विझिंजम पोर्ट की उपलब्धियों में सबसे अहम नाम MSC Irina का है। प्रस्तुति के मुताबिक, 9 जून 2025 को पोर्ट पर इस जहाज को बर्थ और हैंडल किया गया था। करीब 399.99 मीटर लंबाई और 61.33 मीटर चौड़ाई वाले इस जहाज की क्षमता 24,346 TEUs बताई गई है। प्रस्तुति में इसे भारत आने वाला दुनिया का सबसे बड़ा कंटेनर जहाज और दक्षिण एशियाई बंदरगाहों पर आने वाले सबसे बड़े जहाजों में से एक बताया गया है। इसके अलावा MSC Verona को करीब 17.1 मीटर के इनकमिंग ड्राफ्ट के साथ संभालने का भी उल्लेख है, जिसे भारत में गहरे ड्राफ्ट वाले जहाज के संचालन से जुड़ा राष्ट्रीय रिकॉर्ड बताया गया है।

एक ही जहाज से 11,011 TEUs हैंडल करने का रिकॉर्ड
विझिंजम ने अगस्त 2026 में एक ही Vessel Exchange के दौरान 11,011 TEUs हैंडल करने का रिकॉर्ड भी बनाया। प्रस्तुति में इसके लिए MSC Palak का उल्लेख किया गया है। यह उपलब्धियां इस बात का संकेत हैं कि विझिंजम बड़े आकार के कंटेनर जहाजों के संचालन के लिए आवश्यक गहराई, आधुनिक उपकरण और ऑपरेशनल क्षमता विकसित कर चुका है।

2017 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट, 2023 में आया पहला प्रोजेक्ट जहाज
विझिंजम पोर्ट परियोजना की यात्रा 1 जून 2017 को बर्थ निर्माण शुरू होने के साथ आगे बढ़ी। 15 अक्टूबर 2023 को पोर्ट पर पहला प्रोजेक्ट वेसल बर्थ हुआ। इसके बाद 11 जुलाई 2024 को ट्रायल ऑपरेशन शुरू हुआ और 3 दिसंबर 2024 से कमर्शियल ऑपरेशन की शुरुआत हुई। प्रस्तुति के अनुसार, 2 मई 2025 को विझिंजम सीपोर्ट को प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया। इसके बाद 31 अगस्त 2025 तक पोर्ट ने ऑपरेशन शुरू होने के बाद 1 मिलियन TEUs का आंकड़ा हासिल किया। जनवरी 2026 तक पोर्ट का GCR करीब 30 और वॉल्यूम करीब 1.3 मिलियन TEUs बताया गया है।

ऑटोमेशन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
विझिंजम को भारत का पहला ऑटोमेटेड पोर्ट बताया गया है। यहां आधुनिक तकनीक और ऑटोमेशन के जरिए विश्वस्तरीय पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर जोर दिया गया है। पहले चरण के मास्टरप्लान में 800 मीटर बर्थ, 18-20 मीटर ड्राफ्ट, 8 STS क्रेन, 24 CRMG, 4 टग और 3 बोट वाली मरीन फ्लोटिला, 56 ITV तथा करीब 7,410 TGS/1.6 मिलियन TEUs यार्ड क्षमता का उल्लेख है।

18 अगस्त 2026 से शुरू हुआ EXIM ऑपरेशन
प्रस्तुति के मुताबिक, विझिंजम में कंटेनरों का Export-Import (EXIM) ऑपरेशन 18 अगस्त 2026 से शुरू हो चुका है। पोर्ट को दक्षिण भारत के लिए गेटवे पोर्ट के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे व्यापार के लिए समय और लागत दोनों में बचत होने की उम्मीद है। इसके लिए केरल, तिरुपुर, कोयंबटूर और बेंगलुरु जैसे प्रमुख औद्योगिक एवं कारोबारी क्षेत्रों को लक्षित कैचमेंट एरिया के रूप में चिन्हित किया गया है।

LNG बंकरिंग हब बनने की दिशा में कदम
विझिंजम की भूमिका केवल कंटेनर हैंडलिंग तक सीमित रखने की योजना नहीं है। प्रस्तुति में Ship-to-Ship bunkering के ट्रायल पूरे होने और इसे जल्द पूर्ण रूप से शुरू करने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा रणनीतिक साझेदारों के माध्यम से LNG bunkering के लिए MoU किए जाने की बात कही गई है। इसे भारत के पहले LNG बंकरिंग हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पोर्ट पर Crew Change और Shore Leave सेवाएं भी उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। भविष्य में जहाज मरम्मत, क्रूज वेसल और ड्राई डॉकिंग जैसी अतिरिक्त समुद्री सेवाओं की संभावनाएं भी तलाशने की योजना है।

5.7 मिलियन TEUs क्षमता तक विस्तार का मास्टरप्लान
विझिंजम के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य अब इसकी क्षमता को कई गुना बढ़ाना है। प्रस्तावित मास्टरप्लान में फुल-फेज पूरा करने का लक्ष्य दिसंबर 2028 बताया गया है, जबकि पहले इसे 2045 तक पूरा करने की योजना थी। विस्तार के बाद कंटेनर बर्थ में 1,200 मीटर की अतिरिक्त लंबाई जोड़ने की योजना है, जिससे कुल बर्थ लंबाई करीब 2,000 मीटर हो जाएगी। वार्षिक क्षमता को बढ़ाकर 5.7 मिलियन TEUs करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 21 अतिरिक्त RMQC और 45 CRMG जोड़े जाने प्रस्तावित हैं, जिसके बाद कुल क्षमता 29 RMQC और 69 CRMG हो जाएगी। कंटेनर स्टैकिंग को 5 हाई से बढ़ाकर 6 हाई करने की योजना है। साथ ही लिक्विड बर्थ और टैंक फार्म विकसित किए जाएंगे। रेल कनेक्टिविटी को स्थायी रूप से मजबूत करने के साथ क्लोवर ब्रिज के जरिए सड़क कनेक्टिविटी बेहतर करने की योजना भी है।

ब्रेकवाटर और मल्टीपर्पज बर्थ का भी होगा विस्तार
मास्टरप्लान के तहत ब्रेकवाटर में करीब 920 मीटर की अतिरिक्त लंबाई प्रस्तावित है। इसके बाद इसकी कुल लंबाई करीब 3,879 मीटर हो जाएगी। ब्रेकवाटर के साथ दो मल्टीपर्पज बर्थ विकसित किए जाने हैं। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग जोन, ट्रक टर्मिनल, कंटेनर रिपेयर यार्ड और अन्य सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना है।

पोर्ट के साथ औद्योगिक विकास को भी मिलेगी रफ्तार
विझिंजम के आसपास केवल बंदरगाह का विस्तार ही नहीं, बल्कि Port-led Development की व्यापक योजना भी सामने रखी गई है। सरकार की ओर से मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग जोन, कंटेनर रिपेयर यार्ड, एम्प्टी यार्ड, CHA एजेंसियां, फॉरवर्डिंग सेवाएं और ट्रक टर्मिनल जैसी सुविधाओं के विकास से जुड़े प्रयासों का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही केरल और तमिलनाडु में मेगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और मैन्युफैक्चरिंग हब विकसित करने के लिए बड़े भूखंडों को चिन्हित किए जाने की जानकारी भी प्रस्तुति में दी गई है। ऐसे में विझिंजम को सिर्फ समुद्री माल ढुलाई केंद्र के बजाय दक्षिण भारत के औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिश दिखाई देती है।

भारत के समुद्री व्यापार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है विझिंजम?
विझिंजम की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत इसकी भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक गहराई है। अंतरराष्ट्रीय एशिया-यूरोप ट्रेड रूट के करीब होने के कारण बड़े कंटेनर जहाजों को भारतीय तट तक आने के लिए लंबा डिटूर करने की जरूरत कम हो सकती है। गहरे ड्राफ्ट के कारण बड़े जहाजों को संभालने की क्षमता भी इसे प्रतिस्पर्धी बनाती है। अगर प्रस्तावित विस्तार समय पर पूरा होता है, तो 5.7 मिलियन TEUs वार्षिक क्षमता के साथ विझिंजम भारत के सबसे महत्वपूर्ण कंटेनर ट्रांसशिपमेंट और EXIM केंद्रों में शामिल हो सकता है। इसके साथ रेल, सड़क, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक कॉरिडोर और LNG बंकरिंग जैसी सुविधाओं का विकास इसे एक व्यापक पोर्ट-आधारित आर्थिक केंद्र में बदल सकता है।

समुद्री व्यापार के नक्शे पर बड़ी भूमिका की तैयारी
कुल मिलाकर, विझिंजम पोर्ट की कहानी अब केवल एक बंदरगाह के निर्माण की कहानी नहीं रह गई है। 1,100 से अधिक जहाजों और 2.3 मिलियन से अधिक TEUs के मौजूदा ऑपरेशन से लेकर 5.7 मिलियन TEUs की प्रस्तावित क्षमता तक का सफर इसे भारत के समुद्री व्यापार के नक्शे पर एक बड़े रणनीतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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