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असम में CAA पर बड़ा ऐलान : बिना किसी दस्तावेज़ के रहने के लिए कट-ऑफ साल बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2024 किया गया 

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द फॉलोअप डेस्क 
भारत में आने और उसके बाद बिना किसी दस्तावेज़ के रहने के लिए कट-ऑफ साल को बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2024 कर दिया गया है। यह बात बताते हुए सिलचर के विधायक डॉ. राजदीप रॉय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार उन सभी योग्य लोगों को नागरिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्हें तीन पड़ोसी देशों में प्रताड़ित रहे। 'बराक उपत्यका बंग साहित्य सम्मेलन' (BUBSS) की 50वीं वर्षगांठ के उद्घाटन कार्यक्रम में बोलते हुए, डॉ. रॉय ने माना कि CAA के ज़रिए बहुत कम लोगों को नागरिकता मिली है, जिसका मुख्य कारण प्रचार की कमी है। प्रचार की कमी के कारण आवेदन करने से जुड़ी संभावित समस्याओं का डर दूर नहीं हो सका। रॉय ने ज़ोर देकर कहा, "अगर कोई व्यक्ति वास्तव में प्रताड़ित हुआ है, तो सरकार कोई सवाल नहीं उठाएगी।"

भाषा शहीदों का हमेशा सम्मान किया

उन्होंने आगे कहा कि हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने बराक घाटी के उन भाषा शहीदों का हमेशा सम्मान किया है, जिन्होंने 1961 के भाषा आंदोलन में अपनी जान दी थी। पिछले सालों की तरह राज्य सरकार से आर्थिक मदद न मिलने को लेकर BUBSS की नाराज़गी पर रॉय ने कहा कि वह बराक घाटी के सभी विधायकों के साथ मिलकर मुख्यमंत्री से बात करेंगे ताकि घाटी के इस प्रमुख संगठन के लिए एक कॉर्पस फंड (बड़ी राशि का फंड) बनाया जा सके।

बंगालियों की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए बनाया गया था मंच 
सतु रॉय ने कहा कि यह मंच 1977 में बंगालियों की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए बनाया गया था, लेकिन BUBSS हमेशा से दूसरे भाषाई समुदायों के साथ भाईचारे में विश्वास रखता आया है। उन्होंने सभी चुने हुए प्रतिनिधियों से अपील की कि वे विधानसभा में आवाज़ उठाएं ताकि भाषा शहीदों को उचित सम्मान मिल सके। उन्होंने आगे कहा, 1977 में स्थापित 'बराक उपत्यका बंग साहित्य सम्मेलन' अब अपने 50वें साल में प्रवेश कर चुका है और साल भर चलने वाले इस जश्न का उद्घाटन रविवार को बंग भवन में किया गया। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता BUBSS के अध्यक्ष सतु रॉय ने की और मुख्य अतिथि के तौर पर जाने-माने कवि और त्रिपुरा शिक्षा परिषद व त्रिपुरा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष मिहिर कांति देब शामिल हुए।

 

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