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एसिड अटैक केस में लिंगभेद उचित नहीं, पुरुष पीड़ित को 15 लाख मुआवजा दे सरकार- हाईकोर्ट

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रांची:

झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि एसिड अटैक पीड़ित को मुआवजे का भुगतान करने में  उसके लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट में जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमारर श्रीवास्तव की बेंच ने कहा कि एसिड अटैक पीड़ित को मुआवजा देने में उसके लिंग के आधार पर भेदभाव करना अन्याय है।

दरअसल,  शुक्रवार को एसिड अटैक पीड़ित राहुल कुमार की अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उसे पूर्व में मिले 3 लाख रुपये के मुआवजे के अलावा 5 गुना ज्यादा राशि यानी 15 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश राज्य की हेमंत सोरेन सरकार को दिया है। अदालत ने साथ ही सरकार को निर्देश दिया है कि पीड़ित राहुल कुमार के इलाज की भी उचित व्यवस्था की जाए। कोर्ट ने कहा कि एसिड अटैक का पीड़ित के लिंग से कोई लेना-देना नहीं है। इस केस में लिंगभेद करना सरासर अन्याय होगा। 

प्रार्थी राहुल की वकील ने क्या दलील दी
प्रार्थी राहुल कुमार की वकील स्नेहलिका भगत ने कहा कि झारखंड पीड़ित प्रतिकार योजना 2016 के तहत झारखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उनके मुवक्किल को 3 लाख रुपये मुआवजा देने के अलावा उपचार चलने तक इलाज का खर्च वहन करने का आदेश भी सरकार को  दिया था। उन्होंने कहा कि अदालत ने महिला एसिड अटैक पीड़ितों को लेकर कई बार विशेष आदेश जारी किया है। मुआवजे की राशि में बढ़ोतरी के अलावा उपचार का पूरा खर्च उठाने का निर्देश भी सरकार को दििया है, लेकिन पुरुष एसिड अटैक सर्वाइवर के मामले में जो न्यूनतम मुआवजा निर्धारित किया गया है, उससे उनका प्रार्थी संतुष्ट नहीं है। 

वकील स्नेहलिका भगत ने कहा कि उक्त घटना से प्रार्थी राहुल कुमार के सामाजिक, आर्थिक और मानसिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। जो रकम दी गई थी वह प्रार्थी के इलाज के लिए काफी कम है और इसे ही कोर्ट में  चुनौती दी गई थी। 

5 साल बाद स्वीकृत की गई अपील याचिका
प्रार्थी राहुल कुमार की अधिवक्ता स्नेहलिका भगत  ने कहा कि ज्यूडिशियल सिस्टम के इतिहास में यह पहला मामला होगा जब अपील याचिका को 5 साल बाद स्वीकृत किया गया। जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में एसिड अटैक पीड़ित सोनाली बनर्जी और लक्ष्मी कुमारी  के केस में अदालत ने संवेनशीलता को आधार बनाक अपील को  त्वरित रूप से स्वीकृत किया और सुनवाई की। 

महिला पीड़ितों के मामले में त्वरित सुनवाई
अपील याचिका में प्रार्थी राहुल कुमार ने यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद पूरे देश में तेजाब की बिक्री पर रोकथाम और इसकी मॉनिटरिंग के लिए विशेष प्रावधान हैं,  लेकिन झारखंड में तेजाब की खरीद-बिक्री पर कोई रोकथाम या नियम नहीं बनाया गया है।  उन्होंने कोर्ट को बताया कि तेजाब,  झारखंड में खरीद-बिक्री के लिए आसानी से बाजार में उपलब्ध है। 

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