द फॉलोअप डेस्क
असम माउंटेनियरिंग एसोसिएशन ने जानकारी दी है कि लखीमपुर जिले के नागांव पोथार गांव की रहने वाली 26 साल की रूपामणि गोह ने सफलतापूर्वक माउंट एवरेस्ट फतह कर लिया है। इसके साथ ही वह ऐसा करने वाली असम की पहली महिला बन गई हैं। रूपामणि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 11 सदस्यीय महिला टीम का हिस्सा थीं, जिसने 21 मई की सुबह दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की। इस अभियान का नेतृत्व डिप्टी कमांडेंट भनिता तिमुंगपी ने किया, जो गुवाहाटी के नारिकलबारी की रहने वाली हैं और असम माउंटेनियरिंग एसोसिएशन की एक अनुभवी सदस्य हैं। यह अभियान केंद्रीय गृह मंत्रालय के 'नारी शक्ति वंदन' कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया था।

साधारण किसान परिवार से हैं रूपामणि
एक किसान परिवार में जन्मी रूपामणि का पालन-पोषण लीलाबाड़ी में बहुत ही साधारण परिस्थितियों में हुआ। उनके पिता जोयसिंग गोह खेती-बाड़ी का काम करते हैं, जबकि उनकी मां कमलादेवी आंगनवाड़ी सहायिका के तौर पर काम करती हैं। उनके परिवार ने बताया कि आर्ट्स में ग्रेजुएट रूपामणि 2020 में ITBP में शामिल हुईं और उन्होंने अपने बचपन के जुनून, यानी एडवेंचर और पर्वतारोहण को जारी रखा।

सीएम हिमंता ने दी बधाई
पूरे राज्य के लोगों ने इस उपलब्धि के लिए रूपामणि और भनिता को बधाई दी है। लोगों ने इसे असम के लिए एक ऐतिहासिक पल और युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शनिवार को कहा कि राज्य को उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "असम की बेटी दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंच गई है। ITBP की पूरी तरह से महिलाओं वाली अभियान टीम के हिस्से के तौर पर माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली असम की पहली महिला बनने पर रूपामणि गोह को मेरी तरफ से हार्दिक बधाई।"
