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असम में प्रशासनिक सुधार की बड़ी पहल, विधानसभा क्षेत्रों के अनुरूप बनेंगे नए रेवेन्यू सर्कल

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द फॉलोअप डेस्क 
असम सरकार ने विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन के बाद रेवेन्यू सर्कल की सीमाओं को विधानसभा क्षेत्रों के साथ मिलाने के लिए राज्यव्यापी कवायद शुरू की है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को घोषणा की कि उन 13 विधानसभा क्षेत्रों में भी नए रेवेन्यू सर्कल बनाए जाएंगे, जहां अभी कोई सर्कल नहीं है। बजट सत्र के सातवें दिन विधानसभा को संबोधित करते हुए सरमा ने कहा कि मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था के कारण कई विसंगतियां पैदा हुई हैं, जिसमें एक विधानसभा क्षेत्र के गांव अक्सर दूसरे निर्वाचन क्षेत्र या किसी अन्य जिले में स्थित रेवेन्यू सर्कल के अंतर्गत आते हैं। उन्होंने कहा कि इस कवायद का उद्देश्य रेवेन्यू सर्कल और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों (LACs) को "एक-दूसरे के अनुरूप" (co-terminus) बनाना है, जिससे प्रशासनिक दक्षता में सुधार हो और चुने हुए प्रतिनिधियों व निवासियों दोनों के लिए असुविधा कम हो।

परिसीमन के बाद पंचायत सीमाओं को पुनर्गठित किया गया

मुख्यमंत्री ने कहा, "विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन के बाद पंचायत सीमाओं को पुनर्गठित किया गया था। हालांकि, कई जगहों पर रेवेन्यू सर्कल को उसी के अनुसार पुनर्व्यवस्थित नहीं किया गया। नतीजतन, एक निर्वाचन क्षेत्र के गांव दूसरे निर्वाचन क्षेत्र और कुछ मामलों में किसी अन्य जिले के रेवेन्यू सर्कल के अंतर्गत आते हैं।" उन्होंने कहा कि राज्य भर के जिला आयुक्तों (DCs) को दो दिनों के भीतर प्रस्ताव जमा करने का निर्देश दिया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक गांव अपने विधानसभा क्षेत्र से संबंधित रेवेन्यू सर्कल के अंतर्गत आए।

किसी भी मौजूदा रेवेन्यू सर्कल को खत्म नहीं करेंगे 

सरमा ने कहा, "हमारा तत्काल उद्देश्य यह है कि किसी भी विधायक को रेवेन्यू सर्कल में जाने के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर न जाना पड़े। हम इस चरण में किसी भी मौजूदा रेवेन्यू सर्कल को खत्म नहीं कर रहे हैं। हम केवल गांवों का स्थानांतरण करेंगे ताकि रेवेन्यू सर्कल और विधानसभा क्षेत्र एक-दूसरे के अनुरूप हो जाएं।" विसंगतियों को स्पष्ट करते हुए सरमा ने कहा कि दुधनोई में बालीजाना रेवेन्यू सर्कल के अंतर्गत आने वाले गांव गोलपारा पूर्व विधानसभा क्षेत्र से जुड़े हैं, जबकि बरखेत्री की एक पंचायत बारपेटा जिले में सरथेबारी से जुड़ी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन कवायद के बावजूद तिनखोंग के गांव नहारकटिया से जुड़े हुए हैं। गोलाघाट ज़िले का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "सीमाओं के नए बंटवारे (डिलिमिटेशन) के बाद गोलाघाट विधानसभा क्षेत्र के कई गाँव अब डेरगाँव के तहत आते हैं, लेकिन वे अभी भी गोलाघाट रेवेन्यू सर्कल के ही अंतर्गत हैं।

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