गुवाहाटी
असम ने अपना कूलिंग एक्शन प्लान (ACAP) लॉन्च किया है। इसके साथ ही यह भारत के उन शुरुआती राज्यों में शामिल हो गया है जिन्होंने चार अहम सेक्टर - बिल्डिंग, कोल्ड चेन, इंडस्ट्री और ट्रांसपोर्ट - को शामिल करते हुए एक इंटीग्रेटेड स्टेट-लेवल फ्रेमवर्क तैयार किया है। इस प्लान को बुधवार को 'वर्ल्ड ओजोन डे 2026' के मौके पर "ग्लोबल एक्शन फॉर ए कूलर प्लैनेट" यानी, ठंडे ग्रह के लिए वैश्विक कार्रवाई थीम के तहत लॉन्च किया गया। एक्शन प्लान के अनुसार, 2040 तक असम में कूलिंग से जुड़ी बिजली की मांग दोगुनी से अधिक होने का अनुमान है, जो 3,576 GWh से बढ़कर 8,445 GWh हो जाएगी। यह प्लान एनर्जी एफिशिएंट कूलिंग सिस्टम, बेहतर रेफ्रिजरेंट मैनेजमेंट और टिकाऊ, क्लाइमेट-फ्रेंडली तरीकों के जरिए इस अनुमानित बढ़ोतरी से निपटने का प्रयास करता है।

असम क्लाइमेट चेंज मैनेजमेंट सोसाइटी द्वारा तैयार किया गया यह प्लान
WRI इंडिया के टेक्निकल सहयोग से असम क्लाइमेट चेंज मैनेजमेंट सोसाइटी (ACCMS) द्वारा तैयार किया गया यह प्लान, इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान के लक्ष्यों को राज्य-विशिष्ट फ्रेमवर्क में बदलता है। यह एनर्जी एफिशिएंसी, जिम्मेदार रेफ्रिजरेंट मैनेजमेंट, क्लाइमेट-फ्रेंडली कूलिंग टेक्नोलॉजी और संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल के साथ इसे लागू करने पर फोकस करता है। राज्य के वन मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने असम की बढ़ती कूलिंग जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि विकास पर्यावरण संरक्षण के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि ACAP का लॉन्च राज्य को भविष्य की कूलिंग जरूरतों के लिए तैयार करने की दिशा में एक अहम कदम है। अब मुख्य प्राथमिकता विभिन्न विभागों और सेक्टरों के बीच तालमेल के साथ इसे प्रभावी ढंग से लागू करना है।
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