द फॉलोअप, रांची
दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा जल्द मंत्री पद की शपथ ले सकती है। उनके नाम पर पार्टी और सरकार के किसी भी स्तर पर विरोध के कोई स्वर नहीं उभरे हैं। मुख्यमंत्री भी पहले उन्हें मंत्री बना कर गिरिडीह में होने वाले विधानसभा उप चुनाव में उतरना चाहते हैं। मंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने में सरकार के लिए केवल भादो(भाद्रपद) का महीना बिघ्न माना जा रहा है। क्योंकि धार्मिक मान्यता और परंपरा के अनुसार हिंदू धर्मावलंबी भादो के महीने में कोई शुभ कार्य करने से बचते हैं। भादो का महीना 26 सितंबर को समाप्त हो रहा है। सत्ता के गलियारे से संकेत मिलने लगे हैं कि 26 सितंबर के बाद किसी भी दिन सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से रिक्त मंत्री पद को भरने के लिए शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जा सकता है। हालांकि मंत्री पद के दूसरे बर्थ को लेकर अभी भी सरकार और झामुमो में जिच जरूर जारी है। यहां मालूम हो कि हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल में दो बर्थ रिक्त है। एक पूर्व स्कूली शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन से और दूसरा 6 सितंबर को हुई सुदिव्य कुमार सोनू की असमय मृत्यु से।

श्वेता शर्मा को मंत्री बनाए जाने के पीछे हैं कई तर्क
श्वेता शर्मा को मंत्री बनाए जाने के पीछे कई प्रभावी तर्क हैं। वह, एक पढ़ी-लिखी समझदार महिला बतायी जाती है। सुदिव्य सोनू और उनके परिवार के प्रति मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बहुत ही नजदीकी और भावनात्मक रिश्ता भी रहा है। इसका समय समय पर मुख्यमंत्री ने संकेत भी दिया है। मुख्यमंत्री ने सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद दिए किसी भी बयान में उन्हें अपने बड़े भाई के रूप में संबोधित कर रहे हैं। स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू के ब्रह्म भोज में मुख्यमंत्री खुद तो 17 सितंबर को गए, लेकिन कल्पना सोरेन एक दिन पूर्व ही गिरिडीह स्थित सोनू के आवास पहुंच कर शोकाकुल परिवार को सहारा देने में तनिक भी पीछे नहीं रही। यह सोनू के परिवार के प्रति भावनात्मक और आत्मीय रिश्ते को पुख्ता करता है। इसके अलावा राजनीतिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करने पर मंत्रियों के असामयिक निधन के बाद उनके परिवार के सदस्य को मंत्री बना कर चुनाव मैदान में जाने की परंपरा भी रही है। स्वर्गीय रामदास सोरेन का परिवार ही इस परंपरा और रणनीति में एक अपवाद है। अन्यथा टाईगर जगन्नाथ महतो की मौत के बाद उनकी पत्नी बेबी देवी, हाजी हुसैन अंसारी के निधन के बाद उनके पुत्र हफीजुल हसन को मंत्री बनाये जाने का प्रत्यक्ष प्रमाण है। जानकारों के अनुसार गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र का चुनावी गणित भी सरकार को इसी तरह की रणनीति को दुहराने की सलाह देता दिख रहा है। क्योंकि 2024 के विधानसभा चुनाव में सुदिव्य कुमार सोनू कांटे की टक्कर में महज 3400 मतों से विजयी हो सके थे। इसलिए सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद सहानुभूति का लाभ लेने के लिए यह उस क्षेत्र में चुनावी दृष्टि से झामुमो की मारक रणनीति साबित हो सकती है।
मंत्री पद के दूसरे बर्थ को लेकर झामुमो में भारी जिच
यहां मालूम हो कि हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल में रिक्त हुए मंत्रियों के दोनों पद झामुमो कोटे के हैं। मंत्री का एक पद अगर श्वेता शर्मा के खाते में जाता है तो दूसरे पद को लेकर अभी स्थिति उलझन पूर्ण है। पहले तो सरकार के शीर्ष स्तर पर यह स्पष्ट नहीं है कि मंत्री के दोनों ही बर्थ एक साथ भरे जाएंगे। अगर भरे भी जाते हैं तो झामुमो के भीतर क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों के अनुसार कई दावेदारों के नाम उभरते हैं। हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत कुल 7 मंत्री पद झामुमो खाते के हैं जबकि चार कांग्रेस और एक राजद कोटे के हैं। कांग्रेस और राजद कोटे के सभी मंत्री पद भरे पड़े हैं। रिक्ति झामुमो खाते में हैं। सीएम छोड़ झामुमो के चार मंत्री हैं। हफीजुल हसन संथालपरगना क्षेत्र से आते हैं। संथालपरगना से ही मुख्यमंत्री और स्पीकर रबींद्र नाथ महतो भी हैं। इसलिए संथालपरगना से किसी को मंत्री बनाए जाने की दावेदारी कमजोर दिखती है। दक्षिणी छोटानागपुर में झामुमो कोटे से चमरा लिंडा (लोहरदगा) मंत्री हैं। इस प्रमंडल से झामुमो के केवल एक ही दावेदार विकास मुंडा (तमाड़) हो सकते हैं। लेकिन क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण के आधार पर उनकी दावेदारी बहुत मजबूत दिखायी नहीं पड़ रही है। पलामू प्रमंडल से बैद्यनाथ राम को राज्यसभा भेज कर झामुमो एससी बहुल इस क्षेत्र की जातीय समीकरण को पहले ही साधने की चाल चल चुका है। फॉरवर्ड से अनंत प्रताप देव एक दावेदार हो सकते हैं। लेकिन झामुमो फॉरवर्ड कार्ड खेलेगा, इसकी संभावना बहुत ही कम है।
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कोल्हान में मजबूरी और दावेदारी दोनों अधिक
कोल्हान से किसी को मंत्री बनाने की मजबूरी जरूर दिखती है। क्योंकि संथालपरगना के बाद झामुमो को सबसे अधिक सीटें इस प्रमंडल से मिली है। कोल्हान से फिलहाल एक मात्र दीपक बिरुआ मंत्री हैं। इसी कारण यहां से एक मंत्री बनाने की मजबूरी दिखती है। दावेदारों में कुर्मी समाज से आनेवाली सविता महतो(ईचागढ़), संथाल समाज से आनेवाले रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश सोरेन(घाटशिला), एससी समुदाय के मंगल कालिंदी(जुगसलाई), समीर मोहंती(बहरागोड़ा), जोबा मांझी के पुत्र जगत माझी(मनोहरपुर) और संजीव सरदार(पोटका) का नाम भी लिया जा सकता है। सोमेश को जब पिछली बार मंत्री नहीं बनाया गया तो फिलहाल उनके दावे में कोई नया दम आया हो, यह स्पष्ट दिखायी नहीं पड़ रहा है। सविता महतो इसलिए कमजोर पड़ती दिखती है क्योंकि ओबीसी कोटे से योगेंद्र प्रसाद मंत्री हैं और दूसरे नये मंत्री का भी ओबीसी कोटे से बनना तय है। मंगल कालिंदी जिस एससी समुदाय से आते हैं, उन्हें मंत्री बना कर झामुमो का चुनावी रणनीति सधता हुआ नहीं दिखता है। समीर मोहंती के भी मंत्री बनने से दूसरे क्षेत्रों में झामुमो के वोट बैंक में कोई बढोत्तरी होगी, इसकी संभावना बहुत कम है। जगत माझी इसलिए कमजोर पड़ते दिखते हैं, क्योंकि उनकी मां खुद सांसद है। उनके ही हो जनजातीय समुदाय से दीपक बिरुआ मंत्री हैं। संजीव सरदार की जाति का वोट बैंक केवल पोटका तक ही सीमित है।
दूसरे मंत्री पद के लिए उत्तरी छोटानागपुर की संभावनाएं
उत्तरी छोटानागपुर से दो मंत्री थे। सुदिव्य कुमार सोनू और योगेंद्र प्रसाद। सोनू के निधन से एक सीट खाली हो गयी है। स्वभाविक रूप से यह सीट उनकी पत्नी के खाते में जा रही है। अगर मंत्री के दूसरे पद को उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल से भरने की कोशिश हुई तो तीन दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं। गुरुजी के काफी नजदीकी रहे मथुरा महतो और हाल में आजसू से झामुमो में आए उमाकांत रजक के अलावा कल्पना सोरेन। उमाकांत रजक की कमजोरी भर इतनी है कि वह अभी नये हैं। पार्टी नेतृत्व के कितने विश्वसनीय बने हैं, यह स्पष्ट नहीं है। दूसरा, मंत्रिमंडल में एससी समुदाय से राधाकृष्ण किशोर पहले से काबिज हैं। बैजनाथ राम के रूप में झामुमो एससी कार्ड पहले ही खेल चुका है। मथुरा महतो के मामले में भी उलझन यही है कि क्या अब वह पार्टी नेतृत्व के विश्वस्त और बफादार बन चुके हैं। दामाद जय प्रकाश भाई पटेल के भाजपा में जाने के कारण पार्टी नेतृत्व नाराज हुआ था। इसी कारण वह पिछली दफा मंत्री नहीं बन सके। कल्पना सोरेन के बारे में कहा जाता है कि सोरेन परिवार सरकार में अपने खानदान से किसी एक को ही सरकार में रखने में विश्वास करता रहा है। हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद जब चंपाई सोरेन मुख्यमंत्री बने तो बसंत सोरेन मंत्री बनाए गए। लेकिन हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनते ही बसंत सोरेन का पत्ता साफ कर दिया गया। इसलिए पति हेमंत सोरेन का मुख्यमंत्री रहते हुए पत्नी कल्पना सोरेन को मंत्री बनाये जाने की संभावना बहुत ही न्यूनतम है। हां एक चर्चा जरूर है। मथुरा महतो को स्पीकर और रबींद्र नाथ महतो को मंत्री बना दिया जाए। पूर्व में भी स्पीकर पद से हटने के बाद सीपी सिंह राज्य के मंत्री बन चुके हैं।
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