द फॉलोअप, रांची
प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ट्रेजरी घोटाले की सीबीआई जांच को लेकर फिर पत्र लिखा है। उसमें उन्होंने 11 अप्रैल को लिखे पत्र का जिक्र किया है। कहा है, एक महीने से अधिक बीत जाने के बाद बी घोटाले की निष्पक्ष एवं विश्वसनीय जांच की दिशा में आपके स्तर से कोई ठोस पहल नहीं की गयी। आप अभी तक मौन साधे हुए हैं। यदि समय रहते हुए इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो आनेवाले समय में बिहार में हुए चारा घोटाले जैसी परिस्थिति होगी। इसके जद में पदाधिकारियों के साथ–साथ सरकार में बैठे जिम्मेवार नेता भी गिरफ्त में आ जाएंगे।

पत्र में बाबूलाल मरांडी ने आगे लिखा है-यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं प्रतीत होता। यह एक व्यापक और संगठित भ्रष्टाचार का ज्वलंत उदाहरण है। अब तक उपलब्ध सूचनाओं एवं विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार लगभग 14 जिलों में यथा हजारीबाग, बोकारो, पलामू, गढ़वा, रांची, गुमला, देवघर, जमशेदपुर, साहिबगंज एवं अन्य में ट्रेजरी घोटाले की पुष्टि हुई है और उक्त जिलों के 14 कोषागारों से लगभग 130 करोड़ रुपये के अवैध निकासी के मामले आ रहे हैं। जिस गति से प्रतिदिन विभिन्न ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले आ रहे हैं इससे स्पष्ट होता है कि यह घोटाला कहीं अधिक हो सकता है।

इन बिंदुओं की ओर बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन का ध्यान दिलाया
1. प्रारंभिक स्तर पर यह मामला सिर्फ बोकारो और हजारीबाग जिलों तक सीमित हो रहा था। जैसे–जैसे जांच आगे बढ़ी और परतें खुलती गईं और अभी तक लगभग 14 जिलों से अवैध निकासी की पुष्टि हुई है। इससे यह प्रतीत होता है कि कोई स्थानीय स्तर पर या छोटी रकम का घोटाला नहीं है बल्कि पूरे झारखंड में फैला एक संगठित आर्थिक अपराध है। अतः इसकी जांच भी राज्यव्यापी स्तर पर, निष्पक्ष और गहन जांच आवश्यक है।
2. बोकारो में गिरफ्तार लेखापाल कौशल पांडे को इस पूरे घोटाले का मुख्य आरोपी बताना तर्कसंगत नहीं है। एक अकेला लेखापाल ई–कुबेर प्रणाली में छेड़छाड़ कर, किसी सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी की जन्मतिथि में बदलाव कर करोड़ों रुपये की अवैध निकासी जैसे जटिल षड्यंत्र को कैसे अंजाम दे सकता है। इस घोटाले में बोकारो जिला में पदस्थापित Dy. SP. अनिमेष गुप्ता, जो DDO के प्रभार में थे, इनकी भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है। गंभीर तथ्य यह भी है कि बोकारो जिला में मृतक सिपाही उपेंद्र सिंह के नाम पर वेतन की राशि अनु पांडे के खाते में 63 बार स्थानांतरित होती रही और पूरे पुलिस महकमे को इसकी जानकारी तक नहीं हुई। अभी तक जो जानकारी मिली है कि बोकारो जिला में ट्रेजरी से अवैध निकासी की रकम 4.5 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 16 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है। इससे स्पष्ट होता है कि बिना वरीय पुलिस अधिकारियों की जानकारी या संरक्षण के बिना यह संभव नहीं हो सकता था।

3. इस प्रकरण में चिंताजनक पहलू यह है कि कौशल पांडेय जैसे आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति को पूर्व डीआईजी अनुराग गुप्ता, बोकारो के पूर्व पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी, पूर्व पुलिस उप महानिरीक्षक पटेल मयूर कनैयालाल तथा पूर्व डीआईजी (बजट) नौशाद आलम जैसे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए थे। यह तथ्य इस ओर संकेत करता है कि आरोपी को न केवल संरक्षण प्राप्त था, बल्कि उसे संस्थागत स्तर पर प्रोत्साहन भी मिला हुआ था।
4. इसी तरह हजारीबाग जिले में ट्रेजरी से अवैध निकासी की रकम 8 करोड़ रुपये से शुरू होकर अभी तक लगभग 30 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है। और इस अवैध निकासी में हजारीबाग जिले में पदस्थापित सिपाही शंभु कुमार चौधरी, पंकज कुमार उर्फ धीरेन्द्र सिंह की मुख्य संलिप्तता रही है। शंभु कुमार ने 17 वर्षों की नौकरी करने के बावजूद कोई प्रमोशन नहीं लिया और एक ही जगह पर कैसे पदस्थापित होकर ट्रेजरी घोटाले को अंजाम देता रहा।
5. विश्वसनीय सूत्रों एवं प्राप्त जानकारियों के अनुसार राज्य के 14 जिलों में अवस्थित कोषागारों से लगभग 130 करोड़ रुपये के अवैध निकासी की बात सामने आ रही है, जो एक बड़े घोटाले होने का संकेत देता है, जो चारा घोटाला से भी बड़ा घोटाला साबित होने की संभावना है।

6. यह सर्वविदित है कि विभिन्न जिलों में पुलिस प्रशासन में खर्च हेतु ट्रेजरी से होने वाली निकासी की निगरानी की जिम्मेदारी डीडीओ, अर्थात संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) की होती है, जिसे सामान्यतः डीएसपी (मुख्यालय) को सौंप दिया जाता है। ऐसे में इस पूरे घोटाले में जिला स्तर के डीएसपी और एसपी की भूमिका की निष्पक्ष और गहन जांच अत्यंत आवश्यक है।
7. इसके अतिरिक्त, इस पूरे घोटाले में JAP-IT की भूमिका की जांच भी अत्यंत आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि तकनीकी स्तर पर किस प्रकार की हेराफेरी की गई और किन लोगों की इसमें संलिप्तता रही।
