द फॉलोअप, रांची
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 29 मई को नगर विकास एवं आवास विभाग को शहरी क्षेत्रों में जल स्रोतों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। प्रभावी कार्रवाई का निर्देश दिया है। नोटिस, एफआईआर के बाद अवैध संरचनाओं को ध्वस्त करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने यह आदेश उस बैठक में दिया जहां विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह और नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद रांची में जिला प्रशासन और रांची नगर निगम के अधिकारी बड़ी तेजी से हरकत में आ गए हैं। जल स्रोतों पर किए गए अतिक्रमण हटाने को लेकर आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गयी है। रांची नगर निगम ने वार्ड 23 में पंचशीलनगर के 23 भवन मालिकों को नोटिस दिया है। डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने भी इस विषय को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों के साथ बैठक की है। मुख्यमंत्री का आदेश राजधानी रांची के पर्यावरण और आवागमन की दृष्टि से स्वागतयोग्य कदम है। मुख्यमंत्री के मूड को देखते हुए अधिकारी अब तेजी से जल स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बुलडोजर चलाने वाले हैं। इसमें सैंकड़ों लोगों के घर ध्वस्त होंगे। इससे वे लोग भी प्रभावित हो सकते हैं जिन्होंने रांची नगर निगम से नक्शा पास करा कर अपना घर बनाया है। इसलिए एक साथ कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या रांची नगर निगम खुद जल स्रोतों को अतिक्रमण कर बनाये गए संरचनाओं को भी ध्वस्त करेगा। कोकर स्थित डिस्टलरी पुल के पास बना सब्जी मार्केट इसका ज्वलंत उदाहरण है। कमोवेश यही स्थिति राज्य के अन्य प्रमुख शहरों, धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो, हजारीबाग, डालटेनगंज व अन्य की है।

झारखंड हाईकोर्ट ने जब लालपुर से कोकर तक सड़क किनारे लगनेवाले सब्जी बाजार को स्थानांतरित कर यातायात सुगम बनाने का आदेश दिया तो रांची नगर निगम ने डिस्टलरी पुल के पास बहनेवाली छोटी नदी रुपी जल स्रोत पर ही सब्जी मार्केट बना दिया। राजस्व रिकार्ड में आज भी यह जल स्रोत दर्ज है। डिस्टलरी नाला के रूप में चिह्नित है। इसी तरह वृंदावन कॉलोनी के पास बहने वाला नाला, जो सरकारी रिकार्ड में लगभग 27 फीट थी आज चार-पांच फीट में सिकुड़ गयी है। हरमू नदी को अतिक्रमण मुक्त करने की कहानी और कार्रवाई भी किसी खेल और तिकड़कम से कम नहीं है। अलग राज्य बनने के बाद रांची की लाईफ लाइन कही जानेवाली हरमू नदी धीरे धीरे सिकुड़ कर नाला बन गयी। 2008-09 में बुद्धिजीवियों ने हरमू नदी बचाओ आंदोलन शुरू किया। जनजागरुकता अभियान और संकल्प यात्रा प्रारंभ की गयी। 2010-15 के बीच हरमू नदी के जीर्णोद्धार पर 78 करोड़ से अधिक राशि खर्च की गयी। 2020 में तत्कालीन वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की फटकार के बाद जून में नदी का सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रारंभ हुई। कुछ दिन के बाद यह कार्रवाई बंद कर दी गयी। 2023 में फिर जिला प्रशासन का जोश जागा और टास्क फोर्स का गठन किया गया। हरमू नदी, बड़ा तालाब, कांके डैम के 15 मीटर के दायरे में बनी अवैध संरचनाओं को ध्वस्त करने की कार्रवाई प्रारंभ हुई। कुछ दिन के बाद यह कार्रवाई भी बंद कर दी गयी।2025 में हाईकोर्ट ने फिर जल स्रोतों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। सुगुबुगाहट हुई। फिर शांत हो गयी। इसी वर्ष रांची नगर निगम ने हरमू नदी, बड़ा तालाब और अन्य जल स्रोतों का ड्रोन मैपिंग भी कराया। कैचमेंट एरिया का जायजा लिया गया। मामला शांत हो गया। अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने फिर एक बार जल स्रोतों से अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है।

कुछ सवालों के जवाब दिए बगैर अतिक्रमण हटाओ अभियान पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं होगा
नदी-नालों के कैचमेंट एरिया में अगर रांची नगर निगम ने ही नक्शा पास किया है और उस पर किसी ने खून-पसीने की कमाई से अपना आशियाना बनाया है तो क्या उसे भी ध्वस्त किया जाएगा। अगर ध्वस्त किया जाता है तो उस अधिकारी के विरुद्ध भी कार्रवाई होगी जिसने गलत ढंग से नक्शा पास किया। उदाहरण के रूप में रिम्स की जमीन पर हुए अवैध अतिक्रमण के मामले में हाईकोर्ट ने दोषी अधिकारियों से जुर्माना लेने और उसकी पीड़ित को भरपाई करने का आदेश दिया है। उसके बाद एसीबी ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई कर रही है। दोषियों को चिह्नित कर रही है। क्या यह कार्रवाई भी अंजाम तक पहुंच रही है। नहीं पहुंच रही है तो सरकार के शीर्ष पर बैठे अधिकारी उसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अन्यथा समरथ को नहीं कोई दोष गोसाईं वाली कहावत ही चरितार्थ होगी। सवाल यह भी है कि भविष्य में अतिक्रमण नहीं हो, इसके लिए सरकार के शीर्ष अधिकारी क्या कर रहे हैं। उदारण के रूप में रांची का मेन रोड प्रमुख है। वहां से फुटपाथ दुकानदारों को हटा कर कचहरी रोड स्थित अटल वेंडर्स मार्केट में शिफ्ट किया गया। लेकिन वेंडर मार्केट में भी फुटपाथ दुकादारों ने दुकान ले लिया और मेनरोड पर भी वे आज भी दुकान लगा रहे हैं। यह स्थिति कमोवेश राजधानी के अन्य सड़कों की भी है। उनमें लालपुर कोकर रोड, नागाबाबा खटाल, पुरुलिया रोड, बिरसा चौक, हरमू रोड और चर्च रोड पर लगनेवाली सब्जी मार्केट प्रमुख है। सवाल यह भी है कि पिछले 15 साल से अतिक्रमण हटाओ अभियान सफल क्यों नहीं हुआ। किसके प्रभाव में यह शुरू होते ही दम तोड़ता गया।
