सुशील कुमार सिंह/गुमला:
गुमला में कृषि एवं सहकारिता विभाग के माध्यम से बन रहे कोल्ड स्टोरेज का निर्माण अधूरा है। पिछले 7 साल से निर्माणाधीन कोल्ड स्टोरेज अधर में लटका हुआ है। तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें साफ देखा जा सकता है कि निर्माणाधीन कोल्ड स्टोरेज बिल्डिंग खंडहर में तब्दील होने की कगार पर हैं। परिसर में घनी झाड़ियां उग आई हैं और दीवारों पर भी काई के साथ खर-पतवार उग आया है। गुमला में फसलों का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कराया जा रहा था, लेकिन काम अधूरा रहने की वजह से किसानों को नुकसान हुआ। सुरक्षित भंडारण के अभाव में उन्हें अपनी फसल औसत से कम कीमत पर बेचनी पड़ी।

सामाजिक कार्यकर्ता मो. मिन्हाज की शिकायत
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता मो. मिन्हाज शिकायती लहजे में कहते हैं कि सरकार की कथनी और करनी में फर्क है। गुमला में विभिन्न स्थानों पर कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कार्य अधूरा है, जिसका सीधा नुकसान किसानों को हुआ है। किसानों को सब्जियां, अनाज और दलहन जैसी फसलों को सुरक्षित भंडारण के अभाव में स्थानीय खुले बाजार या बड़े कारोबारियों को औने-पौने दाम पर बेचना पड़ता है।

गुमला में किसानों के लिए कोल्ड स्टोरेज जरूरी
सामाजिक कार्यकर्ता अजय किशोर पांडेय कहते हैं कि यदि सरकार को वाकई किसानों की चिंता है तो उन्हें बुनियादी सुविधा मुहैया कराना होगा। उन्होंने कहा कि गुमला में कोल्ड स्टोरेज वक्त की मांग है। इससे किसानों को अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। उन्हें उनके उपज की सही कीमत मिलेगी और आर्थिक लाभ होगा। उन्होंने कहा कि किसानी बचानी है तो कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कार्य पूरा कराना होगा।

कोल्ड स्टोरेज के सवाल पर क्या बोलीं मंत्री!
किसी कार्यक्रम के सिलसिले में गुमला पहुंचीं कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि निर्माणाधीन कोल्ड स्टोरेज पर हमारी नजर है। उन्होंने कहा कि जब विभिन्न जिलों में कोल्ड स्टोरेज का निर्माण शुरू हुआ तो इसमें फॉल्टी डिजाइन की समस्या सामने आई। यदि डिजाइन में खामी हो तो कारोबारी हैंडओवर लेने से इनकार करते हैं। हमारी सरकार डिजाइन में संशोधन करके इन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा कराने के प्रयास में लगी है। वित्तीय दबाव भी है। हाल ही में जामताड़ा में बंद पड़े कोल्ड स्टोरेज को चरणबद्ध तरीके से उपयोग में लाया गया है।
झारखंड में कृषि पर निर्भर होती है बड़ी आबादी
गौरतलब है कि झारखंड कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाला राज्य है। देश का 45 फीसदी खनिज संपदा होने के बावजूद प्रदेश की बड़ी आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। यहां कृषि मानसून का जुआ भी है, क्योंकि नदियों का प्रवाह तंत्र सिंचाई जैसे कार्यों में ज्यादा सहायता नहीं करता। किसान जो फसल उपजाते हैं, उनका सुरक्षित भंडारण नहीं होने से नुकसान होता है। कोल्ड स्टोरेज का निर्माण वर्षों पुरानी मांग है। देखना दिलचस्प होगा कि सरकार कब इस दिशा में गंभीर प्रयासों की ओर बढ़ती है।